भारत 22 और 23 जून 2026 को ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। इस हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और नई तकनीकों से उत्पन्न हो रहे खतरों पर साझा रणनीति तैयार करना है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख हिस्सा लेंगे। बैठक के दौरान दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
वर्तमान समय में सुरक्षा खतरों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सूचना एवं संचार तकनीक का दुरुपयोग, डिजिटल जासूसी और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद जैसी चुनौतियां दुनिया के सामने बड़ी चिंता बनकर उभर रही हैं। इसी वजह से यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में आतंकवाद-रोधी उपायों और सूचना एवं संचार तकनीकों के सुरक्षित उपयोग को लेकर हाल ही में हुई ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों की बैठकों के नतीजों की भी समीक्षा की जाएगी।
भारत इस समय 2026 में चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत ने 2012, 2016 और 2021 में भी इस समूह की अध्यक्षता की थी।
भारत ने इस बार अपनी अध्यक्षता की थीम “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability for Building a Better Future” यानी “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखी है। यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 के रियो शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत मानव-केंद्रित विकास मॉडल से प्रेरित बताया जा रहा है।
ब्रिक्स आज दुनिया के सबसे प्रभावशाली बहुपक्षीय समूहों में से एक बन चुका है। इसमें 11 बड़े उभरते और विकासशील देश शामिल हैं। इनमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
यह मंच वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के कई मुद्दों पर सहयोग और संवाद को बढ़ावा देता है। समय के साथ इसका दायरा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
ब्रिक्स की आधिकारिक रूपरेखा के अनुसार, संगठन तीन प्रमुख स्तंभों पर काम करता है। इनमें राजनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी सहयोग शामिल हैं।
बैठक में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था, व्यापार, विश्व व्यापार संगठन (WTO), दूरसंचार, कृषि और रोजगार जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक रणनीति बनाना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे में दिल्ली में होने वाली यह बैठक आने वाले वर्षों के लिए महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकती है।
भारत के लिए भी यह बैठक कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे वैश्विक मंच पर उसकी नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक भूमिका को और मजबूती मिलेगी।
अब दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, जहां कई अहम सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर साझा समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी।


