गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम में साइबर क्राइम यूनिट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह निवेश के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस के मुताबिक अब तक 2.53 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जबकि जांच के दौरान कई अन्य राज्यों से जुड़े पीड़ितों की जानकारी भी मिली है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह हाईटेक साइबर नेटवर्क दिल्ली से संचालित किया जा रहा था और पिछले छह महीनों से सक्रिय था। गिरोह टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के जरिए अपने पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता था और लोगों को आकर्षक निवेश योजनाओं का लालच देकर फर्जी प्लेटफॉर्म पर पैसा निवेश करने के लिए प्रेरित करता था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 36 मोबाइल फोन, 53 एटीएम कार्ड, 24 बैंक पासबुक, 5 चेकबुक और 2 आईपी कैमरे बरामद किए हैं। बरामद सामान से यह स्पष्ट होता है कि गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और कई बैंक खातों तथा डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करता था।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क का संबंध देश के 15 राज्यों से जुड़े लोगों से है। आरोपियों ने अलग-अलग पहचान और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कई बैंक खाते खुलवाए थे, जिनके जरिए ठगी की रकम को तेजी से इधर-उधर भेजा जाता था, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। शुरुआत में छोटे निवेश पर अधिक मुनाफे का झांसा दिया जाता था। जब पीड़ितों का भरोसा जीत लिया जाता, तब उनसे बड़ी रकम निवेश करवाई जाती और बाद में उनका संपर्क तोड़ दिया जाता था।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह के तार विदेशों से जुड़े हैं या नहीं। पुलिस आरोपियों के डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग लेनदेन का गहन विश्लेषण कर रही है। इसके अलावा अन्य राज्यों की पुलिस और साइबर एजेंसियों से भी संपर्क किया गया है।
गुरुग्राम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें। सोशल मीडिया, टेलीग्राम या अनजान लिंक के माध्यम से मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने को दें।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ रहे डिजिटल निवेश के दौर में साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और डिजिटल जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।


