प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, के माध्यम से युवाओं से सीधे जुड़ने की सलाह दी है। कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने मंत्रियों से पूछा कि वे इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर कितने सक्रिय हैं और सुझाव दिया कि केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं की भाषा और शैली में संवाद भी जरूरी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि देश की बड़ी युवा आबादी इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहती है। ऐसे में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से युवाओं तक पहुंचाने के लिए इंस्टाग्राम रील्स और इंटरैक्टिव कंटेंट का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रियों को ऐसा कंटेंट तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जो युवाओं को आकर्षित करे और उनके साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सके।
इसी कैबिनेट बैठक में सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। इनमें ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन का प्रस्ताव भी शामिल है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक जैसी घटनाओं पर और अधिक सख्ती से रोक लगाना तथा परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए कम से कम पांच वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं, यदि कोई संगठित गिरोह या नेटवर्क पेपर लीक में शामिल पाया जाता है, तो उसे 10 वर्ष तक की कैद और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा माफिया पर प्रभावी कार्रवाई करना और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना है।
यह प्रस्तावित कानून UPSC, SSC जैसी भर्ती परीक्षाओं के साथ-साथ NEET, JEE और CUET जैसी प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं पर भी लागू होगा। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार इस विधेयक को संसद के आगामी सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET पेपर लीक विवाद पर छात्रों के नाम एक वीडियो संदेश भी जारी किया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक कोई छोटा मुद्दा नहीं है और इससे लाखों छात्रों तथा उनके परिवारों को मानसिक और शैक्षणिक नुकसान हुआ है। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए युवाओं से सीधा संवाद और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास आने वाले समय में विश्वास को मजबूत करेंगे। एक ओर जहां मंत्रियों को सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय होने की सलाह दी गई है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है।


