एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भारत के शहरी विकास और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए दो बड़े ऋण पैकेजों को मंजूरी दी है। बैंक ने शहरी सुधार कार्यक्रम के लिए 1 अरब डॉलर और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के विस्तार के लिए 85 करोड़ डॉलर के अतिरिक्त ऋण को स्वीकृति दी है। इस पहल का उद्देश्य शहरों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं विकसित करना और आम लोगों तक किफायती स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच बढ़ाना है।
एडीबी के अनुसार, 1 अरब डॉलर का ऋण भारत सरकार के शहरी सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इस कार्यक्रम के तहत शहरों को आर्थिक विकास, नवाचार और बेहतर जीवन गुणवत्ता के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही शहरी स्थानीय निकायों की संस्थागत क्षमता और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए भी काम किया जाएगा।
एडीबी ने बताया कि यह कार्यक्रम भारत की अर्बन चैलेंज फंड (Urban Challenge Fund) योजना और उससे जुड़े सुधारों के क्रियान्वयन में सहयोग करेगा। इसके तहत शहरों में समेकित विकास योजना, आधुनिक शहरी प्रबंधन और बेहतर वित्तीय व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही नगर निकायों को नगर निगम बॉन्ड और अन्य बाजार आधारित वित्तीय साधनों के जरिए पूंजी जुटाने में भी सहायता मिलेगी।
इस कार्यक्रम में जलवायु-अनुकूल शहरी विकास, सार्वजनिक स्थानों का बेहतर प्रबंधन और परिवहन-केंद्रित विकास (Transit-Oriented Development) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल तकनीक के माध्यम से शहरी प्रशासन में पारदर्शिता, दक्षता और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को भी मजबूत बनाया जाएगा।
एडीबी ने भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में बनने वाली लगभग 70 प्रतिशत नई नौकरियां शहरों में सृजित होती हैं। वहीं, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में शहरों का योगदान लगभग 63 प्रतिशत है, जो वर्ष 2030 तक बढ़कर 75 प्रतिशत होने का अनुमान है। हालांकि, कई शहर अभी भी संसाधनों और वित्तीय क्षमता की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
इसके अलावा, एडीबी ने 85 करोड़ डॉलर का अलग ऋण भारत की रूफटॉप सोलर योजना के विस्तार के लिए मंजूर किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाना, बिजली की लागत कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। इससे लाखों परिवारों को सस्ती और टिकाऊ बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत में एडीबी की कंट्री डायरेक्टर मियो ओका ने कहा कि यह कार्यक्रम ऊर्जा परिवर्तन को लोगों के केंद्र में रखकर आगे बढ़ाएगा। इससे बिजली आपूर्ति प्रणाली मजबूत होगी, ऊर्जा संबंधी जोखिम कम होंगे, हरित रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।
कार्यक्रम के तहत कम से कम 6,000 लोगों को प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया जाएगा, जिनमें कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होंगी। इसके अलावा आदर्श सौर गांवों के विकास, विकेंद्रीकृत सौर परियोजनाओं को बढ़ावा देने तथा सौर पैनलों और बैटरियों के सुरक्षित निपटान एवं पुनर्चक्रण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एडीबी का मानना है कि इन दोनों परियोजनाओं से भारत के शहरी विकास और स्वच्छ ऊर्जा मिशन को नई गति मिलेगी। साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन और टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


