Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

असम बाढ़: पशुधन बचाना बना सबसे बड़ी चुनौती, सरकार और स्वयंसेवी संगठन राहत कार्य में जुटे

असम के पूर्वी हिस्से में लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच अब पशुधन की सुरक्षा भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनकी आजीविका गाय, भैंस, बकरी, सूअर, मुर्गी और अन्य पालतू पशुओं पर निर्भर करती है। ऐसे में सरकार और कई स्वयंसेवी संगठन मिलकर पशुओं को बचाने और उनकी देखभाल के लिए राहत कार्य चला रहे हैं।

राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए चारा, दवाइयों और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, शिवसागर सहित कई प्रभावित जिलों में पशुपालन विभाग की टीमें लगातार राहत शिविरों और बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर पशुओं का इलाज कर रही हैं। साथ ही बीमार और घायल जानवरों को आवश्यक चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

असम की पशुपालन एवं पशु चिकित्सा मंत्री नीलिमा देवी ने कहा कि बाढ़ के इस कठिन समय में केवल लोगों की ही नहीं, बल्कि पशुधन की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि सरकार हर संभव प्रयास कर रही है ताकि प्रभावित परिवारों के पशुओं को सुरक्षित रखा जा सके और उन्हें चारा एवं दवाइयों की कमी का सामना न करना पड़े।

मंत्री नीलिमा देवी ने यह भी कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार के साथ-साथ कई गैर-सरकारी संगठन और स्वयंसेवक भी राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से ‘अहिंसा हेल्पिंग हैंड्स फॉर पॉज़ फाउंडेशन’ तथा ‘परवाह’ संस्था से जुड़े स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया, जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार पशुओं तक चारा और दवाइयां पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों द्वारा गाय, कुत्ते, बिल्ली, बकरी, सूअर और अन्य पालतू जानवरों को भोजन और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। मंत्री ने इन प्रयासों को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे कठिन समय में सभी का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।

बाढ़ के कारण कई गांवों में खेत और पशुशालाएं जलमग्न हो गई हैं, जिससे पशुओं के लिए चारे की भारी कमी पैदा हो गई है। इसके अलावा कई पशु बीमारियों के खतरे का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे में पशुपालन विभाग की मोबाइल मेडिकल टीमें लगातार प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं और जरूरतमंद पशुओं का उपचार कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान पशुधन की सुरक्षा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होती है। यदि समय पर पशुओं को बचाया जाए और उनका इलाज किया जाए, तो प्रभावित परिवारों को आपदा के बाद अपनी आजीविका दोबारा शुरू करने में काफी मदद मिलती है।

फिलहाल असम सरकार, प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठन मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। प्रभावित इलाकों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles