महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपना नौवां अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। उनके इस कदम से राज्य सरकार पर मांगों को लेकर दबाव बढ़ गया है।
भीषण गर्मी के बीच शुरू हुए इस आंदोलन में मनोज जरांगे खुले मैदान में बिना किसी टेंट या छाया के बैठे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कुनबी प्रमाणपत्र की मांग पर अड़े जरांगे
मनोज जरांगे की प्रमुख मांग मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की है, जिससे उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण का लाभ मिल सके। उनका कहना है कि मराठा समाज को न्याय दिलाने के लिए सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने हैदराबाद और सातारा गजट अभिलेखों को लागू करने, मराठा आरक्षण आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और मराठा समुदाय के लिए अलग मंत्रालय गठित करने की भी मांग की है।
सरकार ने बातचीत की कोशिश की
आंदोलन शुरू होते ही महाराष्ट्र सरकार की ओर से मराठा आरक्षण मंत्रिमंडलीय उप-समिति के अध्यक्ष और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल अंतरवाली सराटी पहुंचे। उन्होंने मनोज जरांगे से मुलाकात कर आंदोलन समाप्त करने की अपील की और सरकार की ओर से समाधान निकालने के प्रयासों का भरोसा दिलाया।
विखे पाटिल ने जरांगे से भीषण गर्मी को देखते हुए छायादार स्थान पर बैठने का अनुरोध भी किया, लेकिन आंदोलनकारी नेता अपनी मांगों पर अडिग दिखाई दिए।
राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है असर
मराठा आरक्षण महाराष्ट्र का एक बेहद संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा है। मनोज जरांगे के लगातार आंदोलनों ने राज्य सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का परिणाम राज्य की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर असर डाल सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार मराठा समुदाय की मांगों को लेकर क्या फैसला लेती है और मनोज जरांगे अपना आंदोलन कब तक जारी रखते हैं।


