महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे को लेकर महायुति गठबंधन के भीतर तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार के बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अब्दुल सत्तार ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह योजनाबद्ध तरीके से शिवसेना को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा उन सीटों पर भी अपना दावा पेश कर रही है, जो लंबे समय से शिवसेना का गढ़ मानी जाती रही हैं। सत्तार का कहना है कि गठबंधन में रहते हुए भी उनकी पार्टी को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बातचीत के दौरान सत्तार ने कहा कि भाजपा पहले ही शिवसेना को काफी नुकसान पहुंचा चुकी है और अब पार्टी के अस्तित्व पर ही खतरा पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार गठन के दौरान किए गए राजनीतिक समझौतों को भाजपा भूल चुकी है।
सत्तार के बयान का सबसे अहम हिस्सा शिवसेना के दोनों गुटों के पुनर्मिलन को लेकर था। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में शिवसेना के दोनों धड़ों को एक साथ आने की संभावना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई अटकलें शुरू हो गईं।
हालांकि, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि उनकी पार्टी किसी भी प्रकार के पुनर्मिलन की दिशा में नहीं सोच रही है।
शिंदे ने कहा कि उनकी शिवसेना ही Bal Thackeray की विचारधारा को आगे बढ़ा रही है और जनता का समर्थन भी उनकी पार्टी को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने शिवसेना के धनुष-बाण चुनाव चिन्ह और बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर विश्वास जताया है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार महाराष्ट्र के आम लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप काम कर रही है और भविष्य में भी विकास एवं जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी की विजय यात्रा आगे भी जारी रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन सहयोगियों के बीच मतभेद सामने आना असामान्य नहीं है। लेकिन अब्दुल सत्तार जैसे वरिष्ठ नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से भाजपा पर हमला करना महायुति के भीतर बढ़ते दबाव का संकेत माना जा रहा है।
फिलहाल शिंदे गुट और भाजपा दोनों ही गठबंधन को मजबूत बताने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सत्तार के बयान ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या महायुति के भीतर सब कुछ सामान्य है या फिर सीटों को लेकर अंदरूनी खींचतान बढ़ती जा रही है।


