सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठ रही छात्रों की चिंताओं पर अब संसद की स्थायी समिति गंभीरता से विचार करेगी। शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष Digvijaya Singh ने कहा है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए समिति सभी सुझावों और शिकायतों की गहन समीक्षा करेगी।
मंगलवार को संसद भवन परिसर में आयोजित बैठक में कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत ने समिति के समक्ष अपनी प्रस्तुति रखी। इस दौरान उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निविदा प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे उठाए।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए दिग्विजय सिंह ने बताया कि छात्र द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों और सीबीएसई की ओर से दिए गए जवाबों पर समिति विस्तार से विचार करेगी। उन्होंने कहा कि समिति का मुख्य उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना और उनकी समस्याओं का समाधान तलाशना है।
उन्होंने कहा कि संसदीय समिति हमेशा छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लेती रही है और इस मामले में भी सभी पहलुओं की सावधानीपूर्वक जांच की जाएगी। समिति के सदस्य यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों की चिंताओं को उचित महत्व मिले और आवश्यक सुझावों को रिपोर्ट में शामिल किया जाए।
सार्थक सिद्धांत ने अपनी प्रस्तुति में आरोप लगाया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली से जुड़ी निविदा प्रक्रिया में कुछ शर्तों में बदलाव किए गए, जो कथित तौर पर किसी विशेष सेवा प्रदाता के पक्ष में दिखाई देते हैं। उन्होंने प्रदर्शन मानकों, ब्लैकलिस्टिंग प्रावधानों और पात्रता मानदंडों से जुड़े मुद्दों को भी समिति के सामने रखा।
छात्र ने यह भी सुझाव दिया कि किसी भी नई मूल्यांकन प्रणाली को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले उसका व्यापक पायलट परीक्षण किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे संभावित तकनीकी और प्रशासनिक खामियों की पहचान की जा सकेगी और छात्रों को बेहतर परिणाम मिल सकेंगे।
दिग्विजय सिंह ने बताया कि समिति की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होगी। पहले एक मसौदा रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे समिति के सदस्यों के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद चर्चा और सुझावों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली में तकनीकी बदलावों को लेकर कई बार सवाल उठे हैं। ऐसे में संसदीय समिति द्वारा इस मुद्दे की समीक्षा को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की नजर समिति की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह तय होगा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कौन-कौन से सुधारात्मक कदम सुझाए जाते हैं।


