गुजरात में अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में चलाए गए विशेष ऑपरेशन के दौरान सैकड़ों संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की गई, जिनमें से कई लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में होने का दावा किया गया है।
जानकारी के अनुसार अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और राजकोट पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 322 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। दस्तावेजों, भाषा, पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच के बाद 131 लोगों के बांग्लादेशी नागरिक होने की पुष्टि होने की बात कही गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इन व्यक्तियों के दस्तावेजों की गहन जांच की गई और संबंधित एजेंसियों की मदद से उनकी पहचान सत्यापित की गई। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा भी एकत्र किया जा रहा है। इसमें फिंगरप्रिंट, फोटोग्राफ और अन्य पहचान संबंधी विवरण शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य भविष्य में पहचान सत्यापन को आसान बनाना और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकना है।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री और गृह राज्य मंत्री Harsh Sanghavi के कार्यालय ने बताया कि राज्यभर में चलाए गए इस अभियान के तहत अब तक कुल 501 अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई “ऑपरेशन डेल्टा हंट” के तहत की गई।
सरकार का कहना है कि राज्य में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों और फर्जी पहचान दस्तावेजों के मामलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस और संबंधित एजेंसियां सभी मामलों की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा, पहचान सत्यापन और दस्तावेजों की जांच को लेकर राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना आवश्यक है। इससे अवैध प्रवास और फर्जी पहचान से जुड़े मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की जांच जारी है। संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी कदम कानून के दायरे में रहकर और निर्धारित नियमों के अनुसार उठाए जा रहे हैं।


