वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर रूस से एक बड़ा बयान सामने आया है। रूस की प्रमुख तेल कंपनी रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इगोर सेचीन ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2035 तक दुनिया में तेल की मांग में होने वाली कुल वृद्धि का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से आएगा। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए इगोर सेचीन ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक ऊर्जा खपत का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी, औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और आर्थिक विकास भारत की ऊर्जा जरूरतों को लगातार बढ़ा रहे हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है। हालिया आर्थिक आंकड़ों के अनुसार देश की विकास दर प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर बनी हुई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक और ऊर्जा कंपनियां भारत को भविष्य के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक मान रही हैं।
इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत की आर्थिक प्रगति और रणनीतिक महत्व की सराहना की। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास और साझा हितों पर आधारित हैं। पुतिन ने यह भी कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है।
भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं। शीत युद्ध के दौर से लेकर वर्तमान समय तक दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग किया है। वर्ष 1971 के दौरान सोवियत संघ का समर्थन भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और उसी दौर से दोनों देशों के संबंध और मजबूत हुए।
सोवियत संघ के विघटन के बाद भी भारत और रूस के रिश्तों में निरंतरता बनी रही। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम दिए हैं। वर्तमान में रूस भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है और दोनों देशों के बीच तेल एवं गैस क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत की अर्थव्यवस्था इसी गति से आगे बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में देश वैश्विक ऊर्जा बाजार का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बन सकता है। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी ऊर्जा कंपनियां भारत को अपने दीर्घकालिक निवेश और व्यापारिक योजनाओं के केंद्र में रख रही हैं।
अब सभी की निगाहें आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर भी टिकी हैं, जहां भारत और रूस के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं होने की संभावना है। ऐसे में इगोर सेचीन का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा शक्ति को रेखांकित करता है।


