महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना यानी उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट में संभावित टूट की अटकलों के बीच भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बीजेपी पर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के सांसद और विधायक अगर पार्टी छोड़ रहे हैं, तो उसके कारणों का जवाब खुद शिवसेना यूबीटी नेतृत्व को देना चाहिए।
नागपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए बावनकुले ने कहा कि बीजेपी का इस पूरे घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में जा रहे हैं तो यह शिवसेना का आंतरिक मामला है, इसमें बीजेपी को क्यों घसीटा जा रहा है?
उन्होंने कहा कि न तो मुख्यमंत्री और न ही बीजेपी का कोई नेता इस प्रक्रिया में शामिल है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि शिवसेना यूबीटी के कुछ सांसद पार्टी छोड़कर अलग गुट बना सकते हैं।
इस बीच शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को पाला बदलने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की जा रही है।
संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर के नाम पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और सांसदों को 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है।
हालांकि, बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यह कहना उचित नहीं है कि कोई सांसद या विधायक केवल पैसे के लिए अपना राजनीतिक रुख बदलता है। इसके बजाय यह जांच होनी चाहिए कि आखिर नेता अपनी पार्टी क्यों छोड़ना चाहते हैं।
उन्होंने दोहराया कि बीजेपी का इन घटनाक्रमों से कोई संबंध नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिवसेना यूबीटी के नौ सांसदों में से सात सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और भविष्य की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि साल 2022 में एकनाथ शिंदे और कई विधायकों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था, जिसके बाद शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी।
उस राजनीतिक घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी थी और अब एक बार फिर नए राजनीतिक समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
फिलहाल, महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि शिवसेना यूबीटी में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव होने वाला है या यह केवल राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।


