भारत के शेयर बाजार और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Mukesh Ambani ने घोषणा की है कि जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ दस्तावेजों को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है और इन्हें आज भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI के पास दाखिल किया जाएगा।
कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक यानी AGM के दौरान मुकेश अंबानी ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बोर्ड ने Jio IPO को मंजूरी दे दी है और आज ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना का नेतृत्व Isha Ambani, Akash Ambani और आनंद अंबानी करेंगे।
जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग पिछले कुछ समय से चर्चा में थी। यह लगभग दो दशकों में रिलायंस इंडस्ट्रीज की पहली बड़ी लिस्टिंग मानी जा रही है।
मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो की लिस्टिंग दुनिया को यह दिखाएगी कि भारत वैश्विक स्तर की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि जियो का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।
क्या होता है IPO?
IPO यानी Initial Public Offering वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई कंपनी पहली बार आम निवेशकों के लिए अपने शेयर जारी करती है।
इससे कंपनी पूंजी जुटाती है और शेयर बाजार में सूचीबद्ध होकर एक पब्लिक कंपनी बन जाती है।
अगर निवेशकों को लगता है कि कंपनी भविष्य में अच्छा प्रदर्शन करेगी, तो वे उसके शेयर खरीद सकते हैं।
कितने शेयर जारी हो सकते हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के बोर्ड ने 10 रुपये फेस वैल्यू वाले लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी करने को मंजूरी दी है।
हालांकि, अंतिम आंकड़े नियामकीय मंजूरी और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर तय होंगे।
सरकार के नए नियमों से मिला फायदा
इस साल सरकार ने बड़े बाजार मूल्यांकन वाली कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव किया था।
5 ट्रिलियन रुपये से अधिक के पोस्ट-इश्यू वैल्यूएशन वाली कंपनियां अब कम से कम 2.5 प्रतिशत इक्विटी बेचकर भी सूचीबद्ध हो सकती हैं।
यह पहले लागू 5 प्रतिशत की न्यूनतम सीमा और सामान्य 25 प्रतिशत फ्री-फ्लोट नियम की तुलना में काफी कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से जियो जैसी बड़ी कंपनियों के लिए बाजार में उतरना आसान हो गया है।
भारतीय बाजार के लिए क्यों है खास?
जियो की लिस्टिंग केवल एक कारोबारी घटना नहीं मानी जा रही है, बल्कि इसे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह भारत की तकनीकी क्षमता, निवेश आकर्षण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी नई पहचान दे सकती है।
अब निवेशकों की नजर SEBI की मंजूरी और आगे आने वाले आईपीओ के विवरण पर टिकी हुई है।


