अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने पाकिस्तान की कूटनीतिक उम्मीदों को बड़ा झटका दे दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते ने पाकिस्तान को पूरी तरह चौंका दिया, क्योंकि जिस समझौते को लेकर इस्लामाबाद बड़ी भूमिका निभाने की उम्मीद कर रहा था, वह अचानक फ्रांस के वर्साय में संपन्न हो गया।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहते थे। यहां तक कि स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक समारोह की तैयारियां भी लगभग पूरी हो चुकी थीं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतिम समय में रणनीति बदल दी।
17 जून को फ्रांस के वर्साय में फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron की मौजूदगी में अमेरिका और ईरान के बीच डिजिटल माध्यम से समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद 19 जून को प्रस्तावित स्विट्जरलैंड समारोह को रद्द कर दिया गया। इस फैसले से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा और उसकी कूटनीतिक भूमिका लगभग खत्म हो गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत को लेकर भी बड़ा संदेश सामने आया। राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की सार्वजनिक रूप से तारीफ की और भारत को एक वैश्विक शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका तय करना भारत का अपना निर्णय होगा, क्योंकि भारत अब एक महत्वपूर्ण वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख को दर्शाता है। G7 Summit के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी को कई वैश्विक नेताओं का समर्थन और सम्मान मिला। कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney, यूरोपीय संघ की अध्यक्ष Ursula von der Leyen, इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer और यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ सकारात्मक बातचीत की।
दूसरी ओर, पाकिस्तान के लिए यह घटनाक्रम एक सीख माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका की विदेश नीति अक्सर अचानक बदल सकती है और किसी भी देश को केवल व्यक्तिगत संबंधों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध विकसित किए हैं। व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत और अमेरिका कई मामलों में समान सोच रखते हैं। ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए भारत लगातार शांति और संवाद का समर्थन करता रहा है।
हालांकि, भारत की नीति स्पष्ट है कि वह अपनी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली ने ट्रंप प्रशासन के साथ काम करने का व्यावहारिक तरीका सीख लिया है, जबकि पाकिस्तान अब इस अनुभव से सबक लेने की कोशिश करेगा।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान-अमेरिका समझौते का असर दक्षिण एशिया और वैश्विक राजनीति पर किस प्रकार पड़ता है।


