एफआईएच प्रो लीग 2026 के डच चरण में भारतीय पुरुष हॉकी टीम रविवार को मेजबान नीदरलैंड के खिलाफ अपना आखिरी मुकाबला खेलेगी। टीम इंडिया का लक्ष्य पिछली हार का बदला लेते हुए जीत के साथ इस चरण का समापन करना है। यह मुकाबला आगामी हॉकी विश्व कप और एशियाई खेलों की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब तक टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। दुनिया की आठवें नंबर की टीम भारत को शुरुआती मुकाबले में दूसरे स्थान पर काबिज नीदरलैंड ने 3-2 से हराया था। हालांकि इसके बाद भारत ने शानदार वापसी करते हुए मौजूदा विश्व चैंपियन जर्मनी को 3-1 से हराकर अपनी ताकत दिखाई।
लेकिन रिटर्न मैच में जर्मनी ने वापसी करते हुए भारत को 2-1 से हरा दिया। इस हार ने एक बार फिर भारतीय टीम की पुरानी कमजोरी को उजागर कर दिया, जिसमें टीम आखिरी मिनटों में बढ़त गंवा देती है।
जर्मनी के खिलाफ दूसरे मुकाबले में भारत 56वें मिनट तक बढ़त बनाए हुए था, लेकिन अंतिम छह मिनटों में दो पेनल्टी कॉर्नर दे बैठा। इनमें से एक गोल मुकाबले की अंतिम सीटी बजने से कुछ सेकंड पहले हुआ, जिससे टीम को हार का सामना करना पड़ा।
अब भारतीय टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन इस कमजोरी को दूर करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना है कि बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए आखिरी मिनटों तक एकाग्रता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
एफआईएच प्रो लीग का यह चरण भारत के लिए केवल अंक जुटाने का मंच नहीं है, बल्कि आगामी विश्व कप और एशियाई खेलों के लिए सही टीम संयोजन तैयार करने का भी अवसर है। कोच फुल्टोन लगातार अपनी बेंच स्ट्रेंथ को परख रहे हैं ताकि बड़े टूर्नामेंटों में सर्वश्रेष्ठ संयोजन उतारा जा सके।
भारतीय टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह एक बार फिर टीम की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे। उनकी आक्रामक कप्तानी और पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने की क्षमता टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इसके अलावा अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह भी टीम के लिए बड़ी भूमिका निभाएंगे। हाल ही में उन्होंने भारत के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने का नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने पूर्व कप्तान और वर्तमान हॉकी प्रशासक दिलीप टिर्की के 412 मैचों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
नीदरलैंड के खिलाफ मुकाबले के बाद भारतीय टीम इंग्लैंड रवाना होगी, जहां उसे इंग्लैंड और चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं।
भारत 23 जून को लंदन में पाकिस्तान से भिड़ेगा, जबकि 25 जून को इंग्लैंड के खिलाफ मैदान में उतरेगा। इसके बाद 26 जून को फिर पाकिस्तान और 28 जून को इंग्लैंड से आखिरी मुकाबला होगा।
भारत और पाकिस्तान की टीमें 2024 में चीन में आयोजित एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के बाद पहली बार आमने-सामने होंगी। उस मुकाबले में भारत ने कप्तान हरमनप्रीत सिंह के दो गोलों की मदद से जीत हासिल की थी।
हॉकी विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय टीमों के खिलाफ खेले गए करीबी मुकाबले भारतीय टीम के आत्मविश्वास को मजबूत करेंगे। अगर टीम आखिरी मिनटों में अपनी एकाग्रता बनाए रखने में सफल रहती है तो आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में मजबूत दावेदार बन सकती है।
अब सभी की नजरें नीदरलैंड के खिलाफ होने वाले इस मुकाबले पर टिकी हैं। भारतीय टीम जीत के साथ डच चरण का समापन कर सकारात्मक लय हासिल करना चाहेगी।


