महाराष्ट्र के कल्याण में यूट्यूबर नाजिया इलाही खान के कथित विवादित बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। एक ओर पुलिस ने शिकायत के आधार पर नाजिया इलाही खान के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, वहीं दूसरी ओर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस थाने में लगे कथित हिंसक नारों के वायरल वीडियो ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, समाजसेविका और भाजपा कार्यकर्ता शिफा पावले की शिकायत के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं और विभिन्न संगठनों के लोग बाजारपेठ पुलिस थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि नाजिया इलाही खान के कथित बयान से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने पुलिस से तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की और थाने के बाहर धरना प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर नाजिया इलाही खान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि यह उसी प्रदर्शन के दौरान पुलिस थाने का है। वीडियो में कुछ लोगों द्वारा कथित हिंसक नारे लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें सुनाई देने वाली आवाज़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जा सकती है, तो कथित तौर पर हिंसक या कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाले नारों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इस मामले पर भाजपा नेता महेश पाटिल ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कथित हिंसक नारों की आलोचना करते हुए कहा कि भारत संविधान से चलता है और किसी भी प्रकार की उग्र या हिंसक मानसिकता को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि किसी ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कानूनी कार्रवाई की जाए।
महेश पाटिल ने यह भी कहा कि यदि शिकायतकर्ता शिफा पावले भाजपा से जुड़ी हैं, तो पार्टी नेतृत्व को भी इस पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए। हालांकि, इस संबंध में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल पुलिस की ओर से वायरल वीडियो को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि वीडियो की जांच शुरू की गई है या नहीं। ऐसे मामलों में आमतौर पर पुलिस वीडियो की सत्यता, उसमें शामिल लोगों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई करती है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए। किसी भी विवादित बयान, विरोध प्रदर्शन या कथित हिंसक नारेबाजी से जुड़े मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलना चाहिए।
फिलहाल पुलिस दोनों पहलुओं की जांच कर रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच पूरी होने के बाद प्रशासन इस पूरे मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या वायरल वीडियो से जुड़े आरोपों पर भी कोई आधिकारिक कदम उठाया जाता है।


