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दिल्ली में गर्मी के साथ प्रदूषण का कहर, 85 दिनों में सबसे खराब AQI; हवा हुई ‘खराब’ श्रेणी में

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर लोगों को गर्मी और प्रदूषण की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। रविवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता अचानक बिगड़ गई और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 261 दर्ज किया गया, जो पिछले 85 दिनों में सबसे खराब स्तर है। इससे पहले 17 अप्रैल को AQI 263 दर्ज किया गया था। लगातार बढ़ते प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति गंभीर मानी जा रही है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, रविवार को दिल्ली का AQI ‘खराब’ (Poor) श्रेणी में पहुंच गया। एक दिन पहले यानी शनिवार को यही AQI 140 था, जो ‘मध्यम’ (Moderate) श्रेणी में आता है। इस तरह महज 24 घंटे के भीतर हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई। जुलाई महीने के अधिकांश दिनों में दिल्ली की हवा संतोषजनक और मध्यम श्रेणी में बनी हुई थी, लेकिन रविवार को अचानक हालात बिगड़ गए।

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने इस बदलाव की वजह सीमा पार से आने वाली धूलभरी हवाओं को बताया है। आयोग के अनुसार, अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान में आए धूल भरे तूफानों के कारण बड़ी मात्रा में खनिज धूल (Mineral Dust) हवा के साथ उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंची। इन हवाओं के प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर में PM10 कणों की मात्रा तेजी से बढ़ गई, जिससे वायु गुणवत्ता खराब हो गई।

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में गर्मी और उमस भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम की स्थिति में जल्द बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि AQI खराब रहने के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो मास्क का उपयोग करें और अधिक समय तक खुले वातावरण में रहने से बचें।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में स्थानीय प्रदूषण के साथ-साथ सीमा पार से आने वाली धूल भी समय-समय पर वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में मौसम की दिशा और हवा की गति प्रदूषण के स्तर को तय करने में अहम भूमिका निभाती है।

फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां लगातार हवा की गुणवत्ता पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम में बदलाव और हवाओं की दिशा बदलने के बाद ही प्रदूषण के स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक दिल्लीवासियों को सतर्क रहने और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी गई है।

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