भारत के युवा इंजीनियरों ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्र टीम ‘सी शक्ति’ (Sea Sakthi) ने फ्रांस के पास मोंटे कार्लो में आयोजित प्रतिष्ठित 13वें मोनाको एनर्जी बोट चैलेंज में सर्वोच्च ‘प्रिंस अल्बर्ट द्वितीय मोनाको फाउंडेशन सस्टेनेबल याचिंग टेक्नोलॉजी अवॉर्ड’ अपने नाम कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ टीम को 25,000 यूरो (करीब 25 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई।
यह प्रतियोगिता दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के लिए आयोजित की जाती है, जहां समुद्री परिवहन को अधिक सुरक्षित, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने वाली नई तकनीकों का प्रदर्शन किया जाता है। इस वर्ष प्रतियोगिता में दुनिया के विभिन्न देशों की 26 टीमों ने भाग लिया, लेकिन भारतीय टीम अपनी अभिनव तकनीक के दम पर सबसे बड़ा सम्मान जीतने में सफल रही।
भारतीय टीम को यह पुरस्कार जहाजों के लिए विकसित किए गए एक कम लागत वाले बैटरी थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम के लिए मिला। यह तकनीक बैटरी के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करती है, जिससे उसकी कार्यक्षमता बढ़ती है और ओवरहीटिंग का खतरा कम हो जाता है। टीम ने इस सिस्टम में फेज-चेंज मटेरियल (PCM) का उपयोग किया है, जिसमें मुख्य रूप से पैराफिन और एक्सपेंडेड ग्रेफाइट का इस्तेमाल किया गया। यह समाधान कम लागत में अधिक प्रभावी साबित हुआ और इसी विशेषता ने इसे प्रतियोगिता में सबसे अलग बनाया।
कुमारगुरु कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी के कार्यकारी निदेशक शंकर वनवरयार ने इस उपलब्धि को भारत के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि बैटरी तकनीक भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और भारत को आत्मनिर्भर बनाने में इसकी बड़ी भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि संस्थान पिछले पांच वर्षों से इस प्रतियोगिता में भाग ले रहा है और हर साल 12 से 15 छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं। इस सफलता से छात्रों को वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने का अवसर मिला है।
टीम की ऑपरेशनल एग्जीक्यूटिव रेशमा शेरिफ ने बताया कि यह प्रतियोगिता का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है और पहली बार उनकी टीम इस श्रेणी के लिए क्वालिफाई करने के साथ इसे जीतने में भी सफल रही। उन्होंने कहा कि उनका विकसित किया गया थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम कम लागत वाला होने के साथ-साथ बेहद प्रभावी भी है, जिसने निर्णायकों को प्रभावित किया।
भारतीय टीम की इस उपलब्धि की सराहना यॉट क्लब डी मोनाको के जनरल सेक्रेटरी बर्नार्ड डी’अलेसांड्री ने भी की। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के छात्रों के बीच भारतीय टीम का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले वर्ष भारत से और भी अधिक टीमें इस प्रतियोगिता में भाग लेंगी और वैश्विक मंच पर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करेंगी।
यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, नवाचार और युवा प्रतिभाओं की वैश्विक पहचान का भी प्रतीक है। समुद्री परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने वाली इस तकनीक से भविष्य में ऊर्जा संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और हरित परिवहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत के छात्रों की यह सफलता न केवल शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारतीय युवा वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं।


