भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की जांच और संभावित अतिरिक्त टैरिफ से जुड़ा है। लेकिन अमेरिका के कदम उठाने से पहले ही भारत सरकार ने ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
दरअसल, अमेरिका का आरोप था कि भारत जबरन मजदूरी यानी फोर्स्ड लेबर से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा। इसी आधार पर अमेरिका ने कई देशों के खिलाफ सेक्शन 301 जांच शुरू की, जिसमें भारत भी शामिल है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस जांच के तहत अमेरिका कुछ देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा था। यदि ऐसा होता, तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक शुल्क देना पड़ सकता था, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती थी।
इसी बीच भारत सरकार ने विदेश व्यापार नीति में अहम बदलाव करते हुए नई अधिसूचना जारी की। नए नियमों के अनुसार, अब ऐसे किसी भी उत्पाद के आयात पर रोक लगाई जा सकती है जिसे पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन मजदूरी के जरिए तैयार किया गया हो।
सरकार ने इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा दी गई फोर्स्ड लेबर की परिभाषा को अपनाया है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुरूप व्यापार व्यवस्था को और मजबूत बनाना बताया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह श्रम अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानकों को गंभीरता से लेता है।
सिर्फ नियमों में बदलाव ही नहीं, भारत ने अमेरिका की सेक्शन 301 जांच पर भी औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। भारत का कहना है कि ऐसे व्यापारिक विवादों का समाधान द्विपक्षीय वार्ता और आपसी बातचीत के जरिए होना चाहिए, न कि एकतरफा अतिरिक्त टैरिफ लगाकर।
भारतीय पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि अमेरिका स्वयं कई उत्पादों को अपनी जांच के दायरे से बाहर रखता है। ऐसे में यदि उद्देश्य वास्तव में जबरन मजदूरी से बने सामान पर रोक लगाना है, तो सभी देशों और उत्पादों पर समान मानक लागू होने चाहिए।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देश आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं, इसलिए यह मुद्दा आने वाली व्यापार वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका अपने प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ पर अंतिम फैसला कब करेगा और भारत के नए नियमों का उस निर्णय पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
फिलहाल इतना तय है कि भारत ने अपने व्यापारिक नियमों में बदलाव कर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है और साथ ही अमेरिकी जांच प्रक्रिया पर अपना आधिकारिक पक्ष भी स्पष्ट कर दिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे संभावित टैरिफ विवाद का कोई समाधान निकलता है।


