अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने सेना से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है, जिसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने घोषणा की है कि अब 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हर अमेरिकी सैनिक की सालाना टेस्टोस्टेरोन स्क्रीनिंग की जाएगी। वहीं 30 वर्ष से कम उम्र के सैनिक अपनी इच्छा से यह जांच करा सकेंगे। इस फैसले को अमेरिका ने सैनिकों की लंबी अवधि की सेहत, शारीरिक क्षमता और ऑपरेशनल प्रदर्शन बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। हाल के महीनों में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ी है और सैन्य अभियानों का दबाव भी पहले की तुलना में अधिक हो गया है। इसी बीच सैनिकों के स्वास्थ्य और उनकी कार्यक्षमता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि आधुनिक हथियार और सैन्य तकनीक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी सेना की सबसे बड़ी ताकत उसके सैनिक होते हैं। इसलिए उनकी शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना रक्षा विभाग की प्राथमिकता है।
हेग्सेथ ने कहा कि विज्ञान के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है। इसी कारण 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सैनिकों की नियमित जांच की जाएगी ताकि यदि किसी में हार्मोन का स्तर सामान्य से कम मिले तो समय रहते उचित चिकित्सकीय सलाह और उपचार दिया जा सके।
क्या है टेस्टोस्टेरोन?
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों में पाया जाने वाला प्रमुख हार्मोन है, जो मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के स्वास्थ्य, ऊर्जा, सहनशक्ति और शारीरिक प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका स्तर कम होना सामान्य माना जाता है, लेकिन कुछ मामलों में इसकी कमी व्यक्ति के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।
कैसे होगी स्क्रीनिंग?
पेंटागन के नए कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी सैनिकों की नियमित हेल्थ असेसमेंट के दौरान टेस्टोस्टेरोन की जांच की जाएगी। 30 वर्ष से कम उम्र के सैनिक यदि चाहें तो स्वेच्छा से यह टेस्ट करा सकते हैं। जांच के बाद यदि किसी सैनिक में चिकित्सकीय रूप से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम पाया जाता है, तो डॉक्टर की सलाह पर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
क्या मिलेगी टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT)?
रक्षा मंत्री के अनुसार, जिन सैनिकों में चिकित्सकीय जांच के बाद टेस्टोस्टेरोन का स्तर तय मानकों से कम मिलेगा, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (TRT) का विकल्प दिया जा सकता है। यह उपचार पूरी तरह चिकित्सकीय मूल्यांकन और सैनिक की सहमति पर आधारित होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक TRT जेल, इंजेक्शन, स्किन पैच या दवाओं के रूप में दी जा सकती है।
क्यों हो रही है इस फैसले की चर्चा?
पेंटागन के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे सैनिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों और सैनिकों पर बढ़ते दबाव से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सैनिकों के स्वास्थ्य की निगरानी और उनकी कार्यक्षमता को बनाए रखना है।
फिलहाल यह कार्यक्रम अमेरिकी सेना की नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है। आने वाले समय में इसके परिणामों पर भी दुनिया की नजर रहेगी कि यह पहल सैनिकों के स्वास्थ्य और सैन्य प्रदर्शन पर कितना प्रभाव डालती है।


