मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। सऊदी मीडिया की एक रिपोर्ट में इज़राइली सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई फिलहाल ईरान में मौजूद नहीं हैं। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण या स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस जानकारी को फिलहाल एक अपुष्ट दावा माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सर्वोच्च नेता बनने के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। अब तक उनके संदेश केवल लिखित रूप में जारी किए गए हैं। इसी वजह से उनके ठिकाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि ईरान के भीतर राजनीतिक और सैन्य स्तर पर गंभीर मतभेद मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के भीतर भी कई मुद्दों को लेकर असहमति बढ़ रही है। हालांकि इन दावों की भी किसी स्वतंत्र एजेंसी या ईरान की ओर से पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सर्वोच्च नेता के नाम से जारी होने वाले आधिकारिक संदेश वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मदद से तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन इस संबंध में भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस बीच अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे मध्य पूर्व की स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हाल के दिनों में कई सैन्य घटनाओं और जवाबी कार्रवाइयों के बाद क्षेत्र में संघर्ष की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती गतिविधियां दुनिया भर के ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या अवरोध का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ईरान की ओर से पहले भी यह कहा जा चुका है कि यदि उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो वह इसका जवाब देगा। वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत बनाए हुए हैं। ऐसे में हालात लगातार बदल रहे हैं और हर नया घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि मोजतबा खामेनेई के ईरान से बाहर होने का दावा किसी आधिकारिक स्रोत से पुष्टि नहीं हुआ है। न तो ईरानी सरकार ने इस पर कोई बयान जारी किया है और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने इसकी पुष्टि की है। इसलिए इस खबर को सावधानी के साथ देखा जाना चाहिए।
आने वाले दिनों में यदि ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या इस दावे की पुष्टि अथवा खंडन होता है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और राजनीतिक घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।


