पनामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का खुलकर समर्थन किया है। पनामा का कहना है कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था अब दुनिया की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती और बदलते समय के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-आचा वास्केज़ ने एक विशेष बातचीत में कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और एक उभरती हुई महाशक्ति है। ऐसे में वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रिया में भारत की स्थायी और प्रभावी भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया 80 साल पहले जैसी नहीं रही, इसलिए वैश्विक शासन व्यवस्था में बदलाव समय की मांग है।
विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि पनामा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में भारत को शामिल किए जाने का मजबूत समर्थन करता है। उनके अनुसार, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका प्रभाव उसे इस जिम्मेदारी के योग्य बनाता है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की भी वकालत की। उनका कहना था कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाया जाना चाहिए ताकि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की आवाज़ को उचित स्थान मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों को भी सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
पनामा के विदेश मंत्री के मुताबिक, यदि संयुक्त राष्ट्र में विभिन्न क्षेत्रों का बेहतर प्रतिनिधित्व होगा तो वैश्विक संकटों और संघर्षों का समाधान अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया कई तरह के तनाव और चुनौतियों का सामना कर रही है और इनसे निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी है।
भारत की वर्ष 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पनामा अपनी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेगा। हालांकि उन्होंने भारत के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दोहराते हुए कहा कि उनका देश भारत के साथ मजबूत संबंधों को महत्व देता है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी पनामा ने भारत का समर्थन किया। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद का किसी भी आधार पर कोई औचित्य नहीं हो सकता। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का समर्थन करते हुए कहा कि इस वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए।
पनामा के इस बयान को भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन माना जा रहा है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है, और कई देशों का समर्थन उसे लगातार मिल रहा है।


