गर्दन में दर्द आजकल एक आम समस्या बन चुकी है। लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करना, गलत तरीके से बैठना या तनाव इसकी सामान्य वजहें हो सकती हैं। हालांकि यदि गर्दन का दर्द बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में यह रीढ़ से जुड़ी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कई घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठने से गर्दन की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है। इसी वजह से ऑफिस में काम करने वाले लोग, छात्र और लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले लोगों में गर्दन दर्द की शिकायत अधिक देखी जाती है। सही पॉश्चर न रखने से यह समस्या और बढ़ सकती है।
कुछ मेडिकल अध्ययनों के अनुसार, यदि गर्दन के दर्द के साथ लगातार बुखार, बिना कारण वजन कम होना, तेज सिरदर्द, निगलने में परेशानी, हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन, या ब्लैडर और बॉवेल कंट्रोल में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं और समय पर जांच कराना जरूरी होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ मामलों में गर्दन का दर्द सर्वाइकल रेडिकुलोपैथी, सर्वाइकल मायलोपैथी, स्पाइनल इंफेक्शन, स्पाइनल ट्यूमर या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी जुड़ा हो सकता है। हालांकि इन बीमारियों का पता केवल डॉक्टर की जांच और आवश्यक मेडिकल टेस्ट के बाद ही लगाया जा सकता है।
यदि स्पाइनल इंफेक्शन होता है, तो गर्दन या पीठ में दर्द के साथ बार-बार बुखार आ सकता है। वहीं स्पाइनल ट्यूमर के मामलों में रात के समय दर्द बढ़ना, हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसी तरह मेनिन्जाइटिस जैसी गंभीर स्थिति में गर्दन अकड़ना, तेज बुखार, उल्टी और सिरदर्द जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
गर्दन दर्द से बचाव के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं। काम करते समय स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें, लगातार कई घंटों तक एक ही स्थिति में न बैठें, बीच-बीच में ब्रेक लेकर गर्दन और कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करें तथा बैठते समय रीढ़ और गर्दन को सीधा रखने की कोशिश करें। बहुत ऊंचे या अत्यधिक सख्त तकिए का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए।
इसके अलावा नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव कम करने की कोशिश और शरीर का संतुलित वजन बनाए रखना भी गर्दन की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। भारी सामान उठाते समय दोनों कंधों पर समान भार रखने की आदत भी गर्दन पर अतिरिक्त दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि गर्दन दर्द के साथ हाथों या पैरों में कमजोरी तेजी से बढ़ने लगे, चलने-फिरने में कठिनाई हो, संतुलन बिगड़ने लगे या दर्द के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार से कई गंभीर समस्याओं का सफलतापूर्वक इलाज संभव हो सकता है।


