राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो सका है। चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, घर-घर सत्यापन के दौरान करीब 29 लाख मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले। यह संख्या दिल्ली के कुल मतदाताओं का लगभग 15 से 20 प्रतिशत बताई जा रही है।
बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा किए जा रहे सत्यापन अभियान में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले। कुछ स्थानों पर पड़ोसियों ने भी संबंधित व्यक्ति के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। ऐसे मामलों की रिपोर्ट चुनाव अधिकारियों को भेजी गई है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग नौकरी, पढ़ाई और अन्य कारणों से किराए के मकानों में रहते हैं और समय-समय पर अपना निवास बदलते रहते हैं। हालांकि, इनमें से कई लोग अपने वोटर आईडी में नया पता अपडेट नहीं कराते। यही कारण है कि सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता अपने पुराने पते पर नहीं मिले।
चुनाव अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में मतदाता नई जगह पर अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वा लेते हैं, लेकिन पुराने पते से नाम हटवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं करते। इसके अलावा, पिछले दो दशकों में लाखों लोग दिल्ली छोड़कर अन्य राज्यों में भी बस चुके हैं। ऐसे पुराने रिकॉर्ड भी मतदाता सूची में बने हुए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में ऐसे मतदाताओं के नाम भी सूची में दर्ज हैं जिनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके नाम अब तक हटाए नहीं गए हैं। वहीं, दिल्ली के शहरी गांवों और झुग्गी-बस्तियों में कई मकानों के स्पष्ट नंबर या सही पते उपलब्ध नहीं होने के कारण भी सत्यापन में कठिनाई आ रही है।
चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जिन मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाएगा और जिनके रिकॉर्ड की पुष्टि नहीं होगी, उनके नाम 17 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। हालांकि, यह अंतिम सूची नहीं होगी और इसके बाद मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया जाएगा।
चुनाव अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्होंने हाल ही में अपना निवास बदला है या वोटर आईडी में पता अपडेट नहीं कराया है, तो समय रहते आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना विवरण सही कराएं। इससे भविष्य में मतदान के अधिकार से जुड़ी किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची का नियमित अपडेट लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए जरूरी है। सही और अद्यतन मतदाता सूची से फर्जी मतदान की संभावना कम होती है और वास्तविक मतदाताओं को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जा सकता है।


