मध्य पूर्व में एक बार फिर तेजी से बदलते घटनाक्रमों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह ओमान के साथ होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यदि यह समझौता सफल होता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे समय में जब दुनिया पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, यह समझौता बेहद अहम माना जा रहा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि ओमान के साथ समझौते का मसौदा लगभग तैयार है और यदि किसी प्रकार की बाहरी रुकावट नहीं आई तो जल्द ही दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए संकेत दिया कि अमेरिका की नीतियां इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। माना जा रहा है कि समझौते का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और बंदरगाहों से जुड़े प्रतिबंधों में कोई राहत देता है या नहीं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और दुनिया के कई अन्य देशों तक पहुंचती है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इस समुद्री मार्ग पर निर्भर करता है। इसलिए यहां होने वाला कोई भी राजनीतिक या सैन्य बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को सीधे प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और ओमान के बीच यह समझौता सकारात्मक रूप से आगे बढ़ता है और क्षेत्र में तनाव कम होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना रहता है, तो इस समझौते के प्रभाव सीमित हो सकते हैं। फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान दोनों की आगामी रणनीतियों पर टिकी हुई हैं।
इसी बीच मध्य पूर्व से एक और बड़ी खबर सामने आई है। लेबनान में हुई एक घटना में दो इज़राइली सैनिकों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। पहले से ही संघर्ष और अस्थिरता से जूझ रहे इस इलाके में किसी भी नई सैन्य घटना का असर पूरे क्षेत्र की शांति और वैश्विक कूटनीति पर पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर अफ्रीकी देश सूडान में अप्रैल 2023 से जारी गृहयुद्ध अब केवल मानवीय संकट तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह विश्व धरोहर स्थलों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है। राजधानी खार्तूम से लगभग 200 किलोमीटर उत्तर स्थित मेरोए पिरामिड इस संघर्ष की चपेट में आते दिखाई दे रहे हैं। यह ऐतिहासिक स्थल कुश साम्राज्य की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां 200 से अधिक प्राचीन पिरामिड मौजूद हैं, जिनका निर्माण लगभग 800 ईसा पूर्व से 350 ईस्वी के बीच किया गया था।
युद्ध के कारण इस ऐतिहासिक स्थल पर संरक्षण और पुरातात्विक अनुसंधान का कार्य लगभग पूरी तरह बंद हो चुका है। पुरातत्वविदों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण कार्य दोबारा शुरू नहीं किया गया तो कई पिरामिडों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। पुरातत्वविद् महमूद सुलेमान ने चेतावनी दी है कि लगातार उपेक्षा और संघर्ष के कारण इन प्राचीन संरचनाओं के ढहने का खतरा बढ़ गया है।
यूनेस्को भी पहले ही सूडान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर चिंता जता चुका है। संगठन ने चेतावनी दी थी कि युद्ध के कारण संग्रहालयों, स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन धरोहरों के संरक्षण के लिए सहयोग की अपील की जा रही है।
कुल मिलाकर, ईरान-ओमान समझौते की संभावनाएं, अमेरिकी प्रतिबंधों का भविष्य, लेबनान में बढ़ता सैन्य तनाव और सूडान की विश्व धरोहरों पर मंडराता खतरा—ये सभी घटनाएं आने वाले समय में वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा तय कर सकती हैं। आने वाले दिनों में इन घटनाओं पर दुनिया की नजर बनी रहेगी, क्योंकि इनके प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकते हैं।


