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Social Media पर नहीं चलेगी मनमानी! 2 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट, सरकार के नए नियम होंगे लागू

भारत में डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त अनुपालन नियम लागू करने की तैयारी कर ली है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब Instagram, X (पूर्व में Twitter), YouTube, Facebook और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक, संवेदनशील और अवैध कंटेंट पर पहले से कहीं अधिक तेजी से कार्रवाई करनी होगी। सरकार का उद्देश्य फर्जी खबरों, डीपफेक वीडियो, निजी तस्वीरों के दुरुपयोग और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। नए नियम लागू होने के बाद कुछ श्रेणी के कंटेंट को हटाने के लिए प्लेटफॉर्म्स के पास केवल 120 मिनट यानी 2 घंटे का समय होगा।

डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ सोशल मीडिया आम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि, इसके साथ ही गलत सूचना, फर्जी वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें, डीपफेक तकनीक और निजी जानकारी के दुरुपयोग के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। कई बार कोई आपत्तिजनक पोस्ट कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाती है और संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा, निजता और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती है। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई ही सबसे प्रभावी समाधान हो सकती है। इसी सोच के तहत नई समय-सीमा तय की गई है।

नए नियमों के अनुसार यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट सामने आता है, जिसे गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला या संवेदनशील श्रेणी का माना जाता है, तो संबंधित कंपनी को दो घंटे के भीतर उसकी समीक्षा कर उसे हटाना होगा। पहले ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई के लिए अपेक्षाकृत अधिक समय उपलब्ध था, लेकिन अब डिजिटल दुनिया की तेज गति को देखते हुए समय सीमा काफी कम कर दी गई है। इससे उम्मीद की जा रही है कि गलत जानकारी और आपत्तिजनक सामग्री के वायरल होने से पहले ही उस पर रोक लगाई जा सकेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष प्रकार की सामग्री को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर हटाना होगा। इनमें किसी व्यक्ति की निजी तस्वीर या वीडियो को उसकी अनुमति के बिना साझा करना, डीपफेक वीडियो, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से तैयार किए गए भ्रामक ऑडियो या वीडियो, किसी की पहचान का दुरुपयोग करने वाली सामग्री और अदालत या सरकार द्वारा अवैध घोषित किए गए कंटेंट शामिल हैं। ऐसे मामलों में देरी करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

नई व्यवस्था में अदालत के आदेशों के पालन की समय-सीमा भी कम कर दी गई है। पहले कई मामलों में कंटेंट हटाने के लिए लगभग 36 घंटे तक का समय मिलता था, लेकिन अब ऐसे आदेशों पर अधिकतम तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करना आवश्यक होगा। सरकार का मानना है कि न्यायालय के आदेशों का शीघ्र पालन कानून व्यवस्था और डिजिटल अनुशासन दोनों के लिए आवश्यक है।

इन नियमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कंटेंट पर भी विशेष जोर दिया गया है। यदि कोई फोटो, वीडियो, ऑडियो या अन्य डिजिटल सामग्री AI की सहायता से बनाई गई है, तो उसे अपलोड करते समय स्पष्ट रूप से बताना होगा कि यह AI जनरेटेड कंटेंट है। इसके साथ उचित डिस्क्लेमर और आवश्यक मेटाडेटा भी जोड़ना होगा ताकि दर्शकों को शुरुआत से ही इसकी वास्तविकता की जानकारी मिल सके। इसका उद्देश्य लोगों को भ्रमित होने से बचाना और गलत सूचना के प्रसार पर रोक लगाना है।

यदि कोई कंटेंट निर्माता AI के उपयोग की जानकारी छिपाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी होगी कि वह ऐसे कंटेंट की पहचान करे। आवश्यकता पड़ने पर उस पर वॉटरमार्क लगाया जाए या नियमों के अनुसार उसे हटाया जाए। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मोबाइल कैमरे द्वारा किए जाने वाले सामान्य फोटो एन्हांसमेंट, रंग सुधार (Color Correction) या साधारण एडिटिंग जैसे फीचर्स इन नियमों के दायरे में नहीं आएंगे।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इन नियमों का पालन अब आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ कानूनी सुरक्षा से जुड़ा होगा। सेफ हार्बर वह कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियां अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं मानी जातीं। लेकिन यदि कोई प्लेटफॉर्म तय समय के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटाने या AI आधारित अवैध कंटेंट पर कार्रवाई करने में विफल रहता है, तो वह इस कानूनी सुरक्षा से वंचित हो सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनी और उसके जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सिविल और आपराधिक कार्रवाई भी संभव हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से सोशल मीडिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बन सकता है। फर्जी खबरों, डीपफेक वीडियो, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर उत्पीड़न के मामलों में तेजी से कार्रवाई होने की संभावना बढ़ेगी। वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इतनी कम समय-सीमा में निर्णय लेने के लिए कंपनियां बड़े पैमाने पर AI आधारित कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम का उपयोग करेंगी, जिससे कभी-कभी वैध समाचार, व्यंग्य या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े पोस्ट भी गलती से हटाए जा सकते हैं। इसलिए पारदर्शी समीक्षा प्रक्रिया और अपील व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।

कुल मिलाकर सरकार का यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। यदि इन नियमों का प्रभावी और संतुलित तरीके से पालन किया जाता है, तो ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत होगी, डीपफेक और फर्जी सामग्री पर लगाम लगेगी तथा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित डिजिटल वातावरण मिल सकेगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सख्ती के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैध कंटेंट की सुरक्षा का संतुलन बना रहे।

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