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India की ‘Neighborhood First’ Policy का बड़ा असर! बांग्लादेश से नेपाल तक बदला माहौल, पड़ोसियों संग रिश्ते सुधारने की कोशिश तेज

भारत की ‘Neighborhood First’ नीति को लेकर दक्षिण एशिया में एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। बांग्लादेश और नेपाल के साथ हालिया उच्चस्तरीय मुलाकातों ने इस बात को लेकर चर्चा बढ़ा दी है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए किस तरह सक्रिय कूटनीति अपना रहा है। खास बात यह है कि दोनों देशों के साथ ये मुलाकातें ऐसे समय में हुई हैं, जब पिछले कुछ समय से भारत के रिश्तों में कई तरह की चुनौतियां और तनाव देखने को मिले हैं।

बांग्लादेश में भारतीय हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ मुलाकात को इसी कड़ी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और दिनेश त्रिवेदी ने तारिक रहमान को एक भेंट भी दी। दोनों नेताओं की मुलाकात का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों एक-दूसरे से गर्मजोशी के साथ मिलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के संबंधों में शेख हसीना के मुद्दे को लेकर पिछले कुछ समय से तल्खी देखने को मिली है। ऐसे माहौल में भारतीय प्रतिनिधि और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के बीच सकारात्मक अंदाज में हुई मुलाकात को रिश्तों में संवाद बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

इस मुलाकात से ठीक एक दिन पहले भारतीय हाई कमिश्नर ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान से भी वन-टू-वन मुलाकात की थी। लगातार हो रही इन बैठकों से संकेत मिल रहा है कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने कूटनीतिक संवाद को सक्रिय रखना चाहता है और दोनों देशों के बीच मौजूद मुद्दों पर बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।

दूसरी तरफ नेपाल में भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। नेपाल में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बालन शाह ने जिन शुरुआती विदेशी राजनयिकों से आमने-सामने मुलाकात की, उनमें भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव का नाम शामिल है। इस मुलाकात को भी भारत-नेपाल संबंधों के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नेपाल भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में सीमा, राजनीतिक घटनाक्रम और दूसरे मुद्दों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में कई बार तनाव देखने को मिला है। ऐसे में नए नेपाली नेतृत्व और भारतीय राजदूत के बीच शुरुआती दौर में हुई आमने-सामने की बातचीत को सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत के लिए बांग्लादेश और नेपाल दोनों ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। बांग्लादेश भारत के पूर्वी पड़ोस में स्थित है, जबकि नेपाल भारत के उत्तर में एक अहम पड़ोसी है। दोनों देशों के साथ बेहतर संबंध भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

यही वजह है कि बांग्लादेश और नेपाल में हुई इन मुलाकातों को भारत की ‘Neighborhood First’ नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस नीति के तहत भारत अपने आसपास के देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर देता रहा है।

बांग्लादेश के साथ हालिया मुलाकातों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू संवाद का बने रहना है। शेख हसीना से जुड़े मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद भारत की ओर से उच्चस्तरीय संपर्क जारी रहना यह संकेत देता है कि नई दिल्ली अपने पड़ोसी के साथ रिश्तों को पूरी तरह प्रभावित होने देने के बजाय बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहती है।

वहीं नेपाल में नए प्रधानमंत्री के साथ भारतीय राजदूत की मुलाकात से भी दोनों देशों के बीच भविष्य के संबंधों को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। आने वाले समय में व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।

कुल मिलाकर, बांग्लादेश और नेपाल में हुई ये दोनों मुलाकातें दक्षिण एशिया में भारत की सक्रिय कूटनीति की ओर इशारा करती हैं। हालांकि, सिर्फ एक-दो मुलाकातों के आधार पर रिश्तों में बड़े बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन ऐसे समय में जब दोनों पड़ोसी देशों के साथ कई मुद्दों को लेकर चुनौतियां मौजूद हैं, उच्चस्तरीय संवाद का जारी रहना निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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