स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने भारत की विकास यात्रा, समावेशी प्रगति और समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और यह अवसर देश की अब तक की यात्रा को याद करने के साथ-साथ भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का भी है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों और देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि आजादी केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देशवासियों को अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का भी एहसास कराती है। उन्होंने नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने और देश को मजबूत बनाने के लिए अपने स्तर पर काम करने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति के संबोधन में 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य प्रमुखता से सामने आया। उन्होंने कहा कि विकास का मतलब केवल अर्थव्यवस्था का विस्तार नहीं है, बल्कि इसका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचना भी जरूरी है। उन्होंने समावेशी विकास को भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि देश की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब कमजोर और वंचित वर्गों को भी आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने गरीबी कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश को ऐसा विकास मॉडल अपनाने की जरूरत है, जिसमें आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक सुधार दिखाई दे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक अवसरों तक पहुंच बढ़ाना विकसित भारत के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा सकता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने डिजिटल क्रांति और तकनीक के बढ़ते प्रभाव को भी रेखांकित किया। डिजिटल तकनीक ने सरकारी सेवाओं और वित्तीय सुविधाओं को बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जन धन योजना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने वित्तीय समावेशन की दिशा में हुए बदलावों को देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह में इस बार एक खास बदलाव भी देखने को मिला। राष्ट्रपति के संबोधन से पहले ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों का गायन किया गया और इसके बाद राष्ट्रगान हुआ। स्वतंत्रता दिवस के 80वें वर्ष में प्रवेश के मौके पर हुए इस आयोजन को राष्ट्रीय भावना और देश की ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर देखा गया।
राष्ट्रपति ने भारत की युवा आबादी और तकनीकी क्षमता को देश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में युवाओं की भूमिका देश की विकास यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण होगी। नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी भारत को नए अवसरों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
राष्ट्रपति का संदेश ऐसे समय आया है जब 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य राष्ट्रीय चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी प्रगति और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी लगातार काम करने की आवश्यकता होगी।
राष्ट्रपति मुर्मू ने देशवासियों से स्वतंत्रता के मूल्यों को याद रखते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की अपील की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की विकास यात्रा में सरकार के साथ-साथ नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करके राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है।
भारत के स्वतंत्रता के 80वें वर्ष में प्रवेश के मौके पर राष्ट्रपति का संबोधन देश की उपलब्धियों और भविष्य की उम्मीदों के बीच एक संदेश के रूप में सामने आया। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को एकजुट होकर आगे बढ़ने, विकास के अवसरों को व्यापक बनाने और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की जरूरत होगी।


