दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस का भव्य समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समारोह का नेतृत्व करते हुए लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान पूरे परिसर में देशभक्ति का माहौल नजर आया और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की धुन ने समारोह को और खास बना दिया। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस बार समारोह में इसे विशेष रूप से शामिल किया गया।
स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत तय कार्यक्रम के अनुसार हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद राष्ट्रगान की प्रस्तुति हुई। राष्ट्रगान के दौरान 21 तोपों की सलामी भी दी गई। यह सलामी 1721 फील्ड बैटरी के सेरेमोनियल गनरों ने स्वदेशी 105 मिलीमीटर लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल करते हुए दी। राष्ट्रगान और तोपों की सलामी के तालमेल ने समारोह के माहौल को बेहद भव्य बना दिया।
इस बार लाल किले के समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को खास महत्व दिया गया। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सेना के एक बैंड ने इसकी धुन बजाई। समारोह के दौरान पहली बार इस तरह वंदे मातरम् की प्रस्तुति को विशेष रूप से शामिल किए जाने की चर्चा रही। लाल किले की प्राचीर पर फूलों से की गई सजावट में भी राष्ट्रीय ध्वज को प्रमुखता दी गई थी और उसके आसपास हिंदी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके बाद देश को संबोधित किया। उनका भाषण करीब 75 मिनट तक चला। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की चुनौतियों समेत कई मुद्दों पर बात की। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन देश की राजनीतिक और सामाजिक दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
समारोह में केंद्र सरकार के कई मंत्री और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से करीब 5,000 विशेष अतिथियों को भी आमंत्रित किया गया था। इनमें सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, किसान, महिला उद्यमी, युवा नवप्रवर्तक, वैज्ञानिक, कारीगर और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोग शामिल रहे। इससे समारोह में समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी देखने को मिली।
इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रही। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले और आसपास के इलाकों में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने कार्यक्रम स्थल पर आने वाले लोगों की जांच के साथ आसपास के क्षेत्रों पर भी निगरानी रखी। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच समारोह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया।
समारोह में विपक्ष के प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। जहां सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री और अन्य नेता कार्यक्रम में शामिल हुए, वहीं विपक्ष के कुछ प्रमुख चेहरे समारोह में नजर नहीं आए। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस समारोह की राजनीतिक तस्वीर को लेकर भी चर्चाएं हुईं।
लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का भाषण और वंदे मातरम् की प्रस्तुति इस साल के स्वतंत्रता दिवस समारोह के प्रमुख आकर्षणों में रहे। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में देश की आजादी के इतिहास, राष्ट्रीय प्रतीकों और भविष्य की दिशा को एक साथ सामने रखने की कोशिश दिखाई दी।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसकी धुन का समारोह में विशेष रूप से शामिल होना भी ऐतिहासिक महत्व का विषय रहा। सेना के बैंड की प्रस्तुति और उसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने की परंपरा ने कार्यक्रम में देशभक्ति की भावना को और मजबूत किया। वहीं 21 तोपों की सलामी और राष्ट्रगान के साथ समारोह का औपचारिक हिस्सा भी पूरा हुआ।
कुल मिलाकर लाल किले पर आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक भावनाओं की झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीब 75 मिनट का संबोधन, वंदे मातरम् की विशेष प्रस्तुति, 21 तोपों की सलामी और हजारों विशेष अतिथियों की मौजूदगी ने इस समारोह को खास बना दिया।


