Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

PIMS अस्पताल में आग का कहर! 14 नवजातों की मौत से मचा हड़कंप, शॉर्ट सर्किट पर उठे सवाल

इस्लामाबाद के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी PIMS से बुधवार सुबह एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई, जिसने पूरे पाकिस्तान को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल के मातृ एवं शिशु वार्ड में अचानक भीषण आग भड़क उठी और देखते ही देखते कई नवजात इसकी चपेट में आ गए। हादसे में 14 नवजात बच्चों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि एक बच्चे को डॉक्टर ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आग इतनी तेजी से कैसे फैल गई और मासूम बच्चों को समय रहते क्यों नहीं बचाया जा सका।

बताया जा रहा है कि आग सुबह करीब सात बजे PIMS अस्पताल के मातृ एवं शिशु वार्ड की तीसरी मंजिल पर लगी। जिस वार्ड में आग लगी, वहां उस वक्त कुल 15 नवजात बच्चे मौजूद थे। आग की सूचना मिलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। बचाव दल और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। अधिकारियों के मुताबिक दमकल की छह गाड़ियां और चार एंबुलेंस घटनास्थल पर भेजी गईं और आग पर काबू पाने की कोशिश तेज कर दी गई।

PIMS की प्रवक्ता डॉ. अनीजा जलील के अनुसार, शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि अभी यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है और पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक वार्ड में ऑक्सीजन लाइन मौजूद होने के कारण आग तेजी से फैल गई, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए। आग बुझाने के बाद भी प्रभावित हिस्से को पूरी तरह ठंडा करने में समय लगा, ताकि दोबारा आग भड़कने का खतरा न रहे।

हादसे के दौरान अस्पताल के अंदर डॉक्टर, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ भी मौजूद थे। बताया गया कि एक डॉक्टर ने कम से कम एक नवजात बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। लेकिन बाकी 14 बच्चों को नहीं बचाया जा सका। इस दर्दनाक घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या वार्ड में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम थे? क्या ऑक्सीजन लाइन की सुरक्षा व्यवस्था सही थी? और अगर शॉर्ट सर्किट हुआ था, तो क्या इससे पहले बिजली व्यवस्था में कोई खराबी सामने आई थी?

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस्लामाबाद प्रशासन ने अतिरिक्त उपायुक्त जनरल की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी है। संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने कहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट 14 घंटे के भीतर प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

इस हादसे के बाद मृत नवजातों की पहचान को लेकर भी चुनौती सामने आई है। स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल के मुताबिक अस्पताल प्रशासन ने कुछ बच्चों के माता-पिता से DNA जांच के लिए नमूने मांगे हैं, क्योंकि मृत नवजातों में से कुछ की पहचान तत्काल नहीं हो सकी। यानी हादसे का दर्द सिर्फ मौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई परिवारों के सामने यह सवाल भी खड़ा है कि उनके बच्चे की पहचान कैसे सुनिश्चित होगी।

घटना की जानकारी मिलते ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और पूरे मामले की तत्काल तथा विस्तृत जांच के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी नवजातों की मौत को बेहद हृदयविदारक और अपूरणीय क्षति बताया तथा दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

फिलहाल जांच समिति यह पता लगाने में जुटी है कि आग वास्तव में किस वजह से लगी, वार्ड में सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा था और बचाव अभियान के दौरान कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई। लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने पाकिस्तान के अस्पतालों में नवजात बच्चों की सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है, क्योंकि उसी से यह साफ होगा कि 14 मासूम जिंदगियों को बचाने में आखिर कहां और किस स्तर पर चूक हुई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles