चीनी खरीदने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ दिनों में मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में उम्मीद बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में इस गिरावट का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है और आम लोगों को चीनी कुछ सस्ती मिल सकती है।
दरअसल, चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी के बाद केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी को शुल्क मुक्त तरीके से आयात करने की अनुमति दी है।
इसके अलावा उन चीनी रिफाइनरों को भी घरेलू बाजार में तैयार चीनी बेचने की मंजूरी दी गई है, जिन्हें पहले मुख्य रूप से निर्यात के लिए चीनी तैयार करने की अनुमति थी।
बताया जा रहा है कि रिफाइनरों के पास करीब 3 से 3.5 लाख टन तैयार चीनी उपलब्ध है। इसमें से लगभग 3 लाख टन चीनी जल्द ही घरेलू बाजार में पहुंच सकती है।
सरकार के इस फैसले से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि आने वाले त्योहारों के दौरान जब चीनी की मांग बढ़ेगी, तब बाजार में सप्लाई की कमी की स्थिति न बने।
अब बात करते हैं कीमतों की।
पिछले करीब 10 दिनों में मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। बुधवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मिल स्तर पर चीनी की कीमत करीब 48 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।
वहीं उत्तर प्रदेश में मिल स्तर पर चीनी की कीमत करीब 53 रुपये प्रति किलो रही।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ ही दिनों पहले मिल स्तर की कीमत तेजी से बढ़कर करीब 58 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। यानी बहुत कम समय में कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
एक अधिकारी के मुताबिक, चीनी की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे वास्तविक कमी से ज्यादा बाजार में अटकलों और जमाखोरी की भूमिका हो सकती है। उनका कहना है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं थी।
अब सरकार के फैसले के बाद बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचने की उम्मीद है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
भारतीय चीनी मिल संघ के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने भी कहा है कि चीनी की कीमतों को तर्कसंगत स्तर पर लाने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर दिखाई देने लगा है।
उनके मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की कमी आई है और उम्मीद है कि इसका असर जल्द ही खुदरा बाजार में भी देखने को मिलेगा।
हालांकि, यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम लोगों को सस्ती चीनी कब मिलेगी?
बुधवार को देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो बताई गई। अगर मिल स्तर पर आई कीमतों में गिरावट धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचती है, तो आने वाले दिनों में ग्राहकों को राहत मिल सकती है।
खास तौर पर त्योहारों का मौसम करीब होने के कारण चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है। मिठाइयों और दूसरे खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ चीनी की खपत भी बढ़ सकती है।
ऐसे में सरकार की कोशिश है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद रहे और मांग बढ़ने के बावजूद कीमतों में अनावश्यक तेजी न आए।
10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क मुक्त आयात और घरेलू बाजार में अतिरिक्त तैयार चीनी की उपलब्धता इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि मिल स्तर की कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि खुदरा बाजार में कीमतें तुरंत 20 प्रतिशत कम हो जाएंगी। खुदरा कीमतों पर परिवहन, वितरण, व्यापारी मार्जिन और स्थानीय बाजार की स्थिति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
फिलहाल संकेत सकारात्मक हैं। चीनी की उपलब्धता बढ़ाने की सरकारी कोशिशों और मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट से उम्मीद जगी है कि आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि त्योहारों से पहले चीनी की कीमतें किस स्तर पर स्थिर होती हैं और मिल से लेकर खुदरा बाजार तक कीमतों में गिरावट का कितना फायदा आम आदमी को मिलता है।


