आजकल थायराइड की समस्या को लेकर काफी चर्चा होती है और खासतौर पर महिलाओं में हाइपोथायरायडिज्म जैसी समस्या देखने को मिलती है। थायराइड गर्दन के निचले हिस्से में मौजूद एक छोटी ग्रंथि है, जो शरीर के लिए जरूरी हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं।
जब शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर सामान्य से कम या ज्यादा हो जाता है, तो हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म जैसी स्थितियां हो सकती हैं। इसके दौरान वजन में बदलाव, थकान, कब्ज, मूड में बदलाव और कमजोरी जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित डाइट और सही लाइफस्टाइल भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हाइपोथायरायडिज्म में डाइट को लेकर कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का जिक्र किया जाता है, जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध करा सकते हैं। इनमें पपीता भी शामिल है। पपीते में फाइबर और कई विटामिन पाए जाते हैं, जो पाचन और सामान्य स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, पपीता सीधे तौर पर थायराइड हार्मोन को संतुलित करता है, ऐसा मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
इसके बाद बात आती है धनिये के बीजों की। धनिये के बीजों की चाय को पाचन के लिए इस्तेमाल किया जाता है और कई लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं। इसे पीने से पर्याप्त मात्रा में पानी और कुछ पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व मिल सकते हैं। हालांकि, इसे थायराइड का इलाज या हार्मोन बैलेंस करने वाली दवा नहीं माना जाना चाहिए।
सूरजमुखी के बीज भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। इनमें सेलेनियम, विटामिन ई, मैग्नीशियम और हेल्दी फैट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। सेलेनियम शरीर में थायराइड हार्मोन के मेटाबॉलिज्म में भूमिका निभाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा मात्रा में सूरजमुखी के बीज खाने से थायराइड की समस्या ठीक हो जाएगी। इन्हें संतुलित मात्रा में लेना बेहतर है।
कलौंजी को भी कई लोग पारंपरिक तौर पर अपनी डाइट में इस्तेमाल करते हैं। इसमें अलग-अलग बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं और इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर शोध भी हुआ है। कुछ छोटी स्टडीज में थायराइड से जुड़े संभावित फायदे देखे गए हैं, लेकिन इसके आधार पर कलौंजी को हाइपोथायरायडिज्म की प्रमाणित चिकित्सा कहना सही नहीं होगा। अगर आप थायराइड की दवा लेते हैं तो किसी भी सप्लीमेंट या हर्बल चीज को नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
चिया सीड्स भी इस डाइट लिस्ट में शामिल हैं। इनमें फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। हाइपोथायरायडिज्म में कुछ लोगों को कब्ज की समस्या हो सकती है और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ पाचन को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं। चिया सीड्स को पानी या किसी अन्य भोजन के साथ सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।
मुनक्का भी कई पोषक तत्वों से भरपूर सूखे फल में शामिल है। इसमें प्राकृतिक शुगर, फाइबर और कुछ माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। यह ऊर्जा और पाचन के लिए डाइट का हिस्सा हो सकता है। लेकिन मुनक्का मीठा होने के कारण इसे जरूरत से ज्यादा खाना उचित नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें ब्लड शुगर को लेकर सावधानी रखनी पड़ती है।
अखरोट की बात करें तो इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, हेल्दी फैट और एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। अखरोट को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना सामान्य स्वास्थ्य के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, अखरोट को भी थायराइड का इलाज समझना सही नहीं है।
सबसे जरूरी बात यह है कि हाइपोथायरायडिज्म में केवल किसी एक फूड या घरेलू नुस्खे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। अगर डॉक्टर ने थायराइड की दवा लिखी है, तो उसे अपनी मर्जी से बंद या कम नहीं करना चाहिए। साथ ही आयोडीन, सेलेनियम या किसी दूसरे सप्लीमेंट की अतिरिक्त मात्रा लेने से पहले मेडिकल एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है।
थायराइड की समस्या में हर व्यक्ति की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए डाइट में पपीता, सूरजमुखी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट, मुनक्का या दूसरे खाद्य पदार्थ शामिल करने के साथ-साथ पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्वों वाली संतुलित डाइट पर ध्यान देना चाहिए।
अगर लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव, कब्ज, बाल झड़ना, ठंड ज्यादा लगना या मूड में लगातार बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो खुद से डाइट या दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से जांच और सलाह लेना बेहतर है। सही इलाज, नियमित जांच और संतुलित खान-पान मिलकर थायराइड मैनेजमेंट में मदद कर सकते हैं।

