नेपाल में आई भीषण अचानक बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। त्रिशूली बेसिन में आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। इस आपदा के बीच हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों और भूमिगत पावरहाउस में लोगों के फंसे होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। फंसी जिंदगियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अब भारत भी पूरी ताकत के साथ नेपाल के साथ खड़ा हो गया है।
भारत की खास टनल सर्च एंड रेस्क्यू टीम नेपाल पहुंचकर बचाव अभियान में शामिल हो गई है। भारतीय टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग इलाकों में स्थित महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर टनल साइट्स पर खोज और बचाव अभियान चला रही है। टीम का मुख्य मकसद सुरंगों के अंदर फंसे कर्मचारियों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस विशेष अभियान की पुष्टि की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत की टनल रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ संयुक्त खोज और बचाव अभियान में शामिल हो गई है। टीम चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में हाइड्रोपावर सुरंग स्थलों पर अभियान चला रही है।
दरअसल, त्रिशूली बेसिन में अचानक आई बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं के आसपास हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं। तेज पानी के बहाव और भारी मलबे के कारण कई जगहों पर पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया है। भूमिगत पावरहाउस और सुरंगों तक पहुंचने में भी सुरक्षा बलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सुरंगों के अंदर बचाव अभियान बेहद जोखिम भरा होता है। बाढ़ के बाद सुरंगों में पानी भरने, मलबा जमा होने और रास्ते बंद होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा अंदर की संरचना को नुकसान पहुंचने की स्थिति में रेस्क्यू टीम के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी उपकरणों से लैस भारतीय टीम की भूमिका बेहद अहम हो गई है।
भारतीय और नेपाली टीमें मिलकर प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन कर रही हैं। बचाव दल सुरंगों के अंदर जाने के संभावित रास्तों की तलाश कर रहे हैं और उन स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां लोगों के फंसे होने की संभावना है। हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है, क्योंकि बाढ़ के बाद सुरंगों के भीतर की स्थिति लगातार बदल सकती है।
इस रेस्क्यू ऑपरेशन में समय सबसे महत्वपूर्ण है। सुरंगों में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचना बचाव दल की प्राथमिकता है। इसी वजह से नेपाली सेना और भारतीय टनल रेस्क्यू टीम लगातार अभियान को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं। मुश्किल हालात के बावजूद दोनों देशों की टीमें मिलकर हर संभावित रास्ते को तलाश रही हैं।
भारत की इस मदद को नेपाल के साथ आपदा के समय सहयोग की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। संकट की घड़ी में भारत ने अपनी विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम को नेपाल भेजा है, जो नेपाली सुरक्षा बलों के साथ जमीन पर काम कर रही है। यह अभियान दोनों देशों के बीच मानवीय सहयोग और आपदा प्रबंधन में साझेदारी को भी दर्शाता है।
अब सबसे बड़ी उम्मीद उन परिवारों को है, जिनके अपने लोग हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों और भूमिगत हिस्सों में फंसे हुए हैं। परिवार लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन के सफल होने और अपने करीबियों के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
नेपाल की इस भीषण आपदा के बीच भारत की विशेष रेस्क्यू टीम का मैदान में उतरना राहत की बड़ी खबर है। भारतीय और नेपाली सुरक्षा बल मिलकर सुरंगों में फंसी जिंदगियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस संयुक्त अभियान पर है कि बचाव दल कितनी जल्दी फंसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल पाता है।


