किर्गिस्तान में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख एक बार फिर साफ किया। पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है और अब दुनिया को कभी न खत्म होने वाले युद्ध से निकलकर युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को SCO Summit से इतर मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब रूस-यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया की नजरें बनी हुई हैं।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुई इस मुलाकात की शुरुआत बेहद गर्मजोशी से हुई। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन किया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत शुरू हुई।
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक, दोनों नेताओं की मुलाकात बिश्केक स्थित अला-अर्चा स्टेट रेजिडेंस के अकसाकल मीटिंग रूम में हुई। बैठक में पुतिन के साथ रूस के वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री भी मौजूद रहे।
बातचीत की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के बीच संबंधों को लेकर सकारात्मक बात कही। उन्होंने कहा कि मॉस्को और नई दिल्ली के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत की पुरानी और स्पष्ट नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति के पक्ष में रहा है और उसका मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने युद्ध के मानवीय प्रभाव पर जोर देते हुए कहा कि युद्ध का हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष से सिर्फ देशों के बीच तनाव नहीं बढ़ता, बल्कि आम लोगों को भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब दुनिया को ‘Never Ending War’ यानी कभी न खत्म होने वाले युद्ध से ‘End of War’ यानी युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा। उनका यह संदेश ऐसे समय में आया है जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं।
पीएम मोदी का यह बयान भारत की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें वह रूस के साथ अपने पुराने संबंध बनाए रखते हुए शांति और बातचीत का समर्थन करता रहा है। भारत ने लगातार कहा है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और विवादों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए।
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना रही। रूस भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा का मुद्दा काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
मोदी-पुतिन की यह मुलाकात भारत-रूस संबंधों के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में लंबे समय से संबंध हैं।
SCO Summit के दौरान हुई इस मुलाकात में जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर बातचीत की, वहीं रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने शांति का संदेश भी दिया। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि युद्ध को समाप्त करने की दिशा में आने वाले दिनों में क्या कूटनीतिक पहल होती है।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ था कि संघर्ष को लंबा खींचने के बजाय उसके समाधान की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। भारत युद्ध नहीं, शांति चाहता है और इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री ने ‘Never Ending War’ से ‘End of War’ की ओर बढ़ने की अपील की।


