दुनियाभर में होने वाली मौतों की बड़ी वजहों में हृदय रोग प्रमुख हैं। खासकर पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। ऐसे में खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार के साथ-साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या कोई वैक्सीन हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। इसी बीच शिंगल्स वैक्सीन को लेकर सामने आई एक रिसर्च ने हेल्थ सेक्टर में दिलचस्प चर्चा शुरू कर दी है।
अध्ययन में पाया गया है कि शिंगल्स से बचाव के लिए इस्तेमाल की जाने वाली शिंग्रिक्स वैक्सीन कुछ लोगों में स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसे गंभीर जोखिमों को कम करने में संभावित रूप से मदद कर सकती है। इतना ही नहीं, रिसर्च में इस वैक्सीन और डिमेंशिया के कम जोखिम के बीच भी संबंध सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शिंग्रिक्स को सीधे तौर पर हार्ट अटैक या डिमेंशिया की दवा माना जाए।
शिंगल्स को मेडिकल भाषा में हर्पीज जोस्टर कहा जाता है। यह एक वायरल संक्रमण है, जो शरीर में दर्दनाक चकत्ते और फफोले पैदा कर सकता है। आमतौर पर इसमें शरीर के किसी हिस्से में तेज दर्द, जलन या संवेदनशीलता के बाद त्वचा पर दाने और फफोले दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में संक्रमण के बाद लंबे समय तक नसों में दर्द बना रह सकता है।
शिंगल्स वैक्सीन का मुख्य उद्देश्य इसी संक्रमण से बचाव करना है। लेकिन हालिया रिसर्च ने इसके संभावित अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभों को लेकर वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। अध्ययन में वैक्सीन लेने वाले कुछ लोगों में कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं और डिमेंशिया के जोखिम में कमी देखे जाने की बात सामने आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक संभावित कारण यह हो सकता है कि शिंगल्स संक्रमण शरीर में सूजन और इम्यून सिस्टम से जुड़ी प्रतिक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। वायरल संक्रमण और शरीर में होने वाली सूजन का संबंध कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में शिंगल्स से बचाव करने वाली वैक्सीन के अन्य संभावित प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं।
डिमेंशिया को लेकर सामने आए निष्कर्ष भी खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। डिमेंशिया ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ता है और फिलहाल इसके लिए ऐसी कोई एक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जिसे डिमेंशिया की निश्चित रोकथाम का उपाय माना जाए। इसलिए शिंगल्स वैक्सीन से जुड़े शुरुआती निष्कर्षों को लेकर वैज्ञानिक रुचि बढ़ना स्वाभाविक है।
हालांकि, यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि किसी अध्ययन में दो चीजों के बीच संबंध पाए जाने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि एक चीज दूसरी की वजह है। शिंग्रिक्स वैक्सीन का इस्तेमाल मुख्य रूप से शिंगल्स और उससे होने वाली जटिलताओं से बचाव के लिए किया जाता है। इसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या डिमेंशिया की रोकथाम के लिए अपने आप लेने का फैसला नहीं किया जाना चाहिए।
हृदय रोग से बचाव के लिए आज भी सबसे महत्वपूर्ण कदमों में संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी, वजन को नियंत्रित रखना और ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच शामिल हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से हृदय रोग या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कोई वैक्सीन या दवा लेनी चाहिए।
इस रिसर्च ने जरूर उम्मीद की एक नई दिशा दिखाई है, लेकिन शिंग्रिक्स वैक्सीन को हार्ट अटैक या डिमेंशिया से बचाने वाली निश्चित वैक्सीन कहना अभी जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में और रिसर्च से यह स्पष्ट हो सकता है कि शिंगल्स से बचाव के अलावा इस वैक्सीन के हृदय और मस्तिष्क से जुड़े स्वास्थ्य पर कितने व्यापक प्रभाव हो सकते हैं।

