भारत की राजधानी नई दिल्ली में सितंबर महीने में होने वाला BRICS Summit 2026 सिर्फ कूटनीतिक और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि इसके साथ बड़े स्तर पर निवेश और आर्थिक सहयोग का मंच भी तैयार किया जा रहा है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान आई-ब्रिक्स का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के 500 से अधिक संस्थागत निवेशक, पेंशन फंड और फैमिली ऑफिस हिस्सा लेने वाले हैं।
सबसे खास बात यह है कि इन निवेशकों के पास कुल मिलाकर 1,000 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की संपत्ति प्रबंधन के तहत है। ऐसे में इस आयोजन को BRICS देशों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका फोकस खास तौर पर बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और डिजिटल क्षमता से जुड़ी ऐसी परियोजनाओं पर रहेगा, जिनमें बड़े निवेश की जरूरत है और जो भविष्य में आर्थिक विकास को गति दे सकती हैं।
आई-ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य BRICS के 21 सदस्य और साझेदार देशों में मौजूद परियोजनाओं को संप्रभु पूंजी और बड़े वैश्विक निवेशकों से जोड़ना है। आसान भाषा में समझें तो ऐसे निवेशकों और फंड्स को उन परियोजनाओं तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जहां लंबे समय के लिए बड़ी पूंजी लगाई जा सकती है। इससे बुनियादी ढांचे और ऊर्जा जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने का रास्ता खुल सकता है।
इस आयोजन में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। BRICS अर्थव्यवस्थाएं इस समय बदलती व्यापार परिस्थितियों, अमेरिका की शुल्क नीतियों और डॉलर में लेनदेन की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे माहौल में सदस्य देश और निवेशक पारंपरिक वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ नए विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।
आयोजकों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में निवेश के पारंपरिक रास्तों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकारों, मंत्रालयों, संप्रभु फंड्स और बड़े संस्थागत निवेशकों के बीच सीधा संवाद महत्वपूर्ण हो जाता है। आई-ब्रिक्स इसी तरह का एक समर्पित मंच उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है, जहां नीति बनाने वालों और पूंजी उपलब्ध कराने वाले निवेशकों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा दिया जा सके।
इस आयोजन का एक अहम हिस्सा डिजिटल भुगतान और वित्तीय तकनीक से जुड़ी संभावनाएं भी हो सकती हैं। सम्मेलन में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI और ब्राजील के Pix जैसे राष्ट्रीय त्वरित भुगतान नेटवर्क को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। अगर अलग-अलग देशों के भुगतान नेटवर्क के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होती है, तो सीमा पार डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की संभावनाओं पर भी बातचीत होगी। इसका मतलब अलग-अलग देशों की डिजिटल मुद्राओं के बीच ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय भुगतान को अधिक कुशल तरीके से किया जा सके। हालांकि ऐसी व्यवस्था को लागू करने के लिए तकनीकी, नियामकीय और वित्तीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करना होगा।
BRICS देशों के लिए बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को सड़क, परिवहन, बिजली, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क जैसी सुविधाओं के विस्तार के लिए भारी पूंजी की जरूरत होती है। ऐसे में 1,000 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति संभालने वाले निवेशकों की भागीदारी इस मंच को आर्थिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण बना देती है।
डिजिटल क्षेत्र भी आने वाले वर्षों में BRICS अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल भुगतान, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और नई वित्तीय तकनीकों के विस्तार के साथ इस क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। इसलिए आई-ब्रिक्स में डिजिटल क्षमता से जुड़ी परियोजनाओं पर होने वाली चर्चा का असर भविष्य की निवेश रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।
इस आयोजन की खासियत यह है कि इसमें सिर्फ सरकारों के प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि वास्तविक निवेश क्षमता रखने वाले बड़े वित्तीय संस्थान और फंड भी शामिल होंगे। इससे परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और निवेशकों को संभावित अवसरों की जानकारी देने के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit 2026 और उसके दौरान आयोजित आई-ब्रिक्स सम्मेलन भारत समेत सदस्य और साझेदार देशों के लिए निवेश, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मंच बनने जा रहा है। 500 से अधिक निवेशकों की भागीदारी और 1,000 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति प्रबंधन की क्षमता इस आयोजन के आर्थिक महत्व को और बढ़ाती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सम्मेलन के दौरान किन परियोजनाओं को निवेशकों का समर्थन मिलता है और BRICS देश बदलती वैश्विक व्यापार व्यवस्था के बीच आपसी आर्थिक सहयोग को किस नई दिशा में ले जाते हैं।

