नाखूनों को हम अक्सर सिर्फ हाथों की खूबसूरती और साफ-सफाई से जोड़कर देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाखूनों में होने वाले कुछ बदलाव शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर भी इशारा कर सकते हैं? नाखूनों का रंग, आकार, मोटाई, बनावट या उनकी बढ़ने की गति में अचानक बदलाव कई बार किसी बीमारी या पोषण की कमी से जुड़ा हो सकता है। हालांकि सिर्फ नाखून देखकर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन असामान्य बदलाव दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।
स्वस्थ नाखून आमतौर पर एकसमान रंग और चिकनी सतह वाले होते हैं। अगर नाखूनों में अचानक रंग बदलने लगे, उनमें असामान्य धारियां दिखाई दें, मोटाई बढ़ जाए या उनका आकार बदलने लगे, तो इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनमें चोट, संक्रमण, पोषण की कमी और कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए नाखूनों में लगातार बने रहने वाले बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है।
नाखूनों में सफेद रंग या सफेद निशान दिखाई देना भी कई कारणों से हो सकता है। कई बार हल्की चोट या नाखून पर दबाव पड़ने के बाद ऐसे निशान दिखाई देते हैं। वहीं कुछ मामलों में फंगल इंफेक्शन या अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए हर सफेद निशान को किसी गंभीर बीमारी का संकेत मानना सही नहीं है। अगर निशान लगातार बने रहें या बार-बार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
इसी तरह नाखूनों का पीला पड़ना भी कई कारणों से हो सकता है। फंगल इंफेक्शन इसकी एक सामान्य वजह हो सकती है। इसके अलावा धूम्रपान, कुछ दवाएं या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी नाखूनों के रंग को प्रभावित कर सकती हैं। अगर नाखून लंबे समय तक पीले रहें और साथ में मोटे या कमजोर भी होने लगें, तो चिकित्सकीय जांच कराना उचित है।
नाखूनों की बनावट में बदलाव भी ध्यान देने लायक होता है। अगर नाखून बहुत ज्यादा भंगुर हो जाएं, बार-बार टूटें या उनकी सतह असामान्य रूप से खुरदरी हो जाए, तो इसके पीछे पोषण की कमी, संक्रमण या अन्य कारण हो सकते हैं। आयरन की कमी जैसे मामलों में नाखूनों में कमजोरी या आकार में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि इन लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी तय नहीं करनी चाहिए।
कुछ लोगों में नाखून चम्मच की तरह अंदर की ओर मुड़े हुए दिखाई दे सकते हैं। इस तरह के बदलाव को मेडिकल भाषा में कोइलोनिकिया कहा जाता है और यह कई बार आयरन की कमी से जुड़ा हो सकता है। अगर ऐसा बदलाव लगातार दिखाई दे रहा है, तो डॉक्टर जरूरत पड़ने पर खून की जांच के जरिए इसके कारण का पता लगा सकते हैं।
नाखूनों के आकार और उंगलियों के सिरे में बदलाव भी कुछ स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, उंगलियों के सिरों का असामान्य रूप से उभरना और नाखूनों का ज्यादा गोल या घुमावदार होना क्लबिंग कहलाता है। यह कभी-कभी फेफड़ों या हृदय से जुड़ी कुछ बीमारियों के साथ देखा जा सकता है। लेकिन इसका कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
डायबिटीज की बात करें तो केवल नाखून देखकर यह कहना संभव नहीं है कि किसी व्यक्ति को Diabetes है। हालांकि डायबिटीज के कारण शरीर में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और इससे नाखूनों या आसपास की त्वचा में फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए नाखूनों में बार-बार संक्रमण या अन्य असामान्य बदलाव हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
सबसे ज्यादा सावधानी नाखून के नीचे अचानक दिखाई देने वाली भूरी या काली लाइन को लेकर बरतनी चाहिए। ऐसी लाइन कई सामान्य कारणों से भी हो सकती है, लेकिन कुछ मामलों में यह मेलानोमा नामक त्वचा कैंसर का संकेत हो सकती है। खासतौर पर अगर एक ही नाखून में नई गहरी लाइन दिखाई दे, उसका रंग या आकार बदल रहा हो या वह समय के साथ चौड़ी हो रही हो, तो त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
हालांकि हर काली या भूरी लाइन कैंसर नहीं होती। चोट, पिगमेंटेशन और कई अन्य कारणों से भी नाखून के नीचे गहरी लाइन दिखाई दे सकती है। इसलिए सोशल मीडिया या इंटरनेट पर देखकर खुद से कैंसर का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। असामान्य बदलाव लगातार बना रहे या बढ़ रहा हो, तो विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।
नाखूनों में बदलाव के साथ अगर शरीर में लगातार थकान, वजन में अनजाना बदलाव, सांस लेने में परेशानी, त्वचा या आंखों के रंग में बदलाव अथवा अन्य परेशानियां भी मौजूद हों, तो डॉक्टर को पूरी जानकारी देनी चाहिए। डॉक्टर नाखूनों के साथ दूसरे लक्षणों और जरूरत पड़ने पर जांच के आधार पर सही कारण पता कर सकते हैं।
कुल मिलाकर नाखून शरीर की स्थिति के बारे में कुछ संकेत दे सकते हैं, लेकिन वे किसी बीमारी की पक्की जांच नहीं हैं। इसलिए नाखूनों में अचानक या लगातार बदलाव दिखाई देने पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। खासकर नाखून के नीचे नई काली या भूरी लाइन, तेजी से बदलता रंग-रूप, लगातार दर्द, सूजन या संक्रमण जैसी समस्या हो तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। समय पर जांच किसी गंभीर समस्या की पहचान और इलाज में मदद कर सकती है।


