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CCEA ने Indian Railways की ₹20,000 करोड़ से ज्यादा की 8 परियोजनाओं को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी CCEA ने भारतीय रेलवे से जुड़ी 20,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली आठ बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाना और माल ढुलाई को मजबूत करना है। सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं से भारतीय रेल नेटवर्क में करीब 1,200 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।

इन आठ परियोजनाओं का विस्तार पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 20 से ज्यादा जिलों में होगा। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इन क्षेत्रों में रेल संपर्क और परिवहन व्यवस्था को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इससे करीब 6,900 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी और बड़ी संख्या में लोगों को आवागमन की सुविधा बेहतर होगी।

स्वीकृत परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा और कटनी-पेंड्रा रोड खंड के बीच चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इसके अलावा बिलासपुर यानी उसलापुर से पेंड्रा रोड के बीच तीसरी लाइन बिछाई जाएगी। दक्षिण भारत में अरक्कोणम-रेणिगुंटा और व्हाइटफील्ड-बंगारपेट के बीच तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण किया जाएगा। वहीं सिकंदराबाद के घाटकेसर से काजीपेट खंड में मल्टी-ट्रैकिंग का काम भी किया जाएगा।

इसके साथ ही हासुर-ओमलूर और सेलम-करूर-दिंडीगुल खंड में मौजूदा सिंगल रेल लाइन को डबल लाइन में बदला जाएगा। इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा फायदा रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने के रूप में सामने आएगा। अधिक ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेनों को चलाने के लिए अतिरिक्त क्षमता मिलेगी, जिससे भीड़भाड़ कम करने, परिचालन दक्षता बढ़ाने और रेल सेवाओं को अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी।

सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसमें विभिन्न विभागों और संबंधित पक्षों के साथ समन्वय करते हुए रेल नेटवर्क के विस्तार की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य यात्रियों के साथ-साथ वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतर मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी तैयार करना है।

नई रेल परियोजनाओं से कई महत्वपूर्ण पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होने की उम्मीद है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्रीक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य, अमरकंटक मंदिर और अचानकमार बाघ अभयारण्य जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। बेहतर रेल संपर्क से इन स्थानों पर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की यात्रा आसान हो सकती है।

इन परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माल ढुलाई से भी जुड़ा है। नए और अतिरिक्त रेल ट्रैक बनने से कोयला, सीमेंट, लौह और इस्पात जैसी वस्तुओं की ढुलाई क्षमता बढ़ेगी। सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर साल करीब 7.4 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। इससे देश के लॉजिस्टिक्स सिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सरकार का दावा है कि रेल परिवहन की क्षमता बढ़ने से सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा और लॉजिस्टिक लागत घटाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ईंधन की खपत और तेल आयात में कमी लाने तथा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाने में भी इन परियोजनाओं की भूमिका हो सकती है। अनुमान के मुताबिक उत्सर्जन में होने वाली कमी करीब 4.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताई गई है।

वहीं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं की जानकारी देने के साथ देश की बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि भारत में विकसित की जा रही हाई-स्पीड ट्रेन अगले साल मई-जून तक परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगी। इसके अलावा गुजरात में सूरत-वापी के करीब 100 किलोमीटर लंबे खंड पर बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने की समयसीमा अगले साल अगस्त तय की गई है। ऐसे में रेलवे के लिए नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के साथ हाई-स्पीड रेल परियोजना को भी देश के परिवहन ढांचे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

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