अगर परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या किसी करीबी रिश्तेदार को टाइप-2 डायबिटीज है, तो व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी ज्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए। फैमिली हिस्ट्री डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि परिवार में किसी को डायबिटीज होने पर आपको भी यह बीमारी निश्चित रूप से हो जाएगी। टाइप-2 डायबिटीज का खतरा आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ रोजमर्रा की जीवनशैली और कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
टाइप-2 डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता या समय के साथ इंसुलिन की पर्याप्त मात्रा नहीं बन पाती। अगर परिवार में करीबी रिश्तेदार को यह बीमारी है, तो आनुवंशिक प्रवृत्ति के कारण आपका जोखिम सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक हो सकता है। खासतौर पर माता-पिता या भाई-बहन में टाइप-2 डायबिटीज होने पर अपनी लाइफस्टाइल और नियमित स्वास्थ्य जांच को लेकर ज्यादा सावधान रहना जरूरी हो जाता है।
हालांकि केवल जीन ही डायबिटीज का कारण नहीं होते। वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास अधिक चर्बी जमा होना, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और लंबे समय तक खराब लाइफस्टाइल भी टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा उम्र बढ़ना और कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए फैमिली हिस्ट्री होने पर इन सभी कारकों को नियंत्रित करने की कोशिश करना महत्वपूर्ण है।
वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखना डायबिटीज से बचाव की दिशा में एक अहम कदम माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति का वजन ज्यादा है, तो डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार धीरे-धीरे वजन कम करने की कोशिश करनी चाहिए। खासतौर पर कमर और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी पर ध्यान देना जरूरी है। वजन में थोड़ी कमी भी कई लोगों में मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।
शारीरिक गतिविधि को अपनी रोजाना की दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना, रोजाना वॉक करना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित एक्सरसाइज करना मददगार हो सकता है। जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, उनके लिए नियमित शारीरिक गतिविधि खासतौर पर महत्वपूर्ण हो जाती है।
खानपान में भी छोटे लेकिन लगातार बदलाव किए जा सकते हैं। बहुत ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ, शुगर वाले ड्रिंक, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचना बेहतर है। इसके बजाय सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ और संतुलित मात्रा में प्रोटीन को डाइट में शामिल किया जा सकता है। भोजन की मात्रा और खाने के समय पर भी ध्यान देना जरूरी है।
फैमिली हिस्ट्री होने पर नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसी जांच कराई जा सकती है। अगर किसी जांच में ब्लड शुगर सामान्य से अधिक आता है, तो डॉक्टर आगे की जांच और आवश्यक कदमों की सलाह दे सकते हैं। खासकर अगर साथ में वजन बढ़ना या अन्य जोखिम कारक मौजूद हों, तो जांच को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
सबसे जरूरी बात यह है कि परिवार में डायबिटीज होने को अपनी किस्मत मानकर डरने के बजाय इसे एक चेतावनी की तरह लें। आनुवंशिक जोखिम को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वजन, शारीरिक गतिविधि, खानपान और नियमित जांच जैसे कई पहलुओं पर काम किया जा सकता है। इसलिए अगर आपके परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार को टाइप-2 डायबिटीज है, तो समय रहते स्वस्थ आदतें अपनाना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्क्रीनिंग कराना भविष्य में जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

