पीरियड्स से पहले महिलाओं के शरीर और मूड में कई तरह के बदलाव होना सामान्य बात है। कई महिलाओं को मासिक धर्म शुरू होने से कुछ दिन पहले ही लक्षण महसूस होने लगते हैं, जबकि कुछ में ये बदलाव एक से दो हफ्ते पहले शुरू हो सकते हैं। आमतौर पर इन्हें प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानी PMS कहा जाता है। लेकिन हर लक्षण को सामान्य PMS मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। कुछ बदलाव ऐसे भी हो सकते हैं, जिन्हें बार-बार महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
PMS के सामान्य लक्षणों की बात करें तो इनमें पेट फूलना, हल्का पेट दर्द, सिरदर्द, ब्रेस्ट में दर्द या संवेदनशीलता, थकान, नींद में बदलाव और मूड स्विंग्स शामिल हो सकते हैं। इस दौरान कई महिलाओं को मीठा या नमकीन खाने की इच्छा भी ज्यादा हो सकती है। आमतौर पर ये लक्षण पीरियड्स शुरू होने से करीब एक-दो हफ्ते पहले दिखाई दे सकते हैं और मासिक धर्म शुरू होने के बाद धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। अगर हर महीने लक्षण लगभग एक जैसे हों और पीरियड्स आने के बाद ठीक हो जाएं, तो आमतौर पर इन्हें PMS का हिस्सा माना जाता है।
हालांकि, समस्या तब हो सकती है जब मूड में बदलाव सामान्य सीमा से बहुत ज्यादा हो जाए। अगर पीरियड्स से पहले इतना अधिक गुस्सा, चिड़चिड़ापन या भावनात्मक बदलाव महसूस हो कि खुद पर नियंत्रण रखना मुश्किल लगे और इसका असर काम, पढ़ाई, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो इसे सिर्फ PMS समझकर सहते रहना ठीक नहीं है। ऐसे गंभीर भावनात्मक लक्षण कुछ महिलाओं में PMDD जैसी स्थिति से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसके लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी हो सकती है।
इसी तरह बहुत तेज या लगातार पेल्विक दर्द को भी सामान्य PMS मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर दर्द इतना ज्यादा हो कि सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगें या हर महीने लगातार बना रहे, तो इसके पीछे एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या जैसी वजह हो सकती है। ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि केवल PMS मान लेने से सही कारण का पता लगाने में देरी हो सकती है।
पीरियड्स से पहले हर महीने बहुत ज्यादा एंग्जायटी, गुस्सा या डिप्रेशन महसूस होना भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है। खासकर तब, जब ये भावनात्मक बदलाव आपकी सामान्य जिंदगी को प्रभावित करने लगें। अगर उदासी, निराशा या बेचैनी बहुत ज्यादा बढ़ रही हो, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना बेहतर है।
ब्रेस्ट में गांठ महसूस होना भी ऐसा संकेत है, जिस पर ध्यान देना चाहिए। मासिक चक्र के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से ब्रेस्ट में संवेदनशीलता या अस्थायी बदलाव हो सकते हैं, लेकिन अगर कोई गांठ बार-बार महसूस हो, बनी रहे या उसके साथ अन्य असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर महिला में PMS के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल यह देखकर कि कोई बदलाव पीरियड्स से पहले होता है, उसे सामान्य मान लेना सही नहीं है। अगर कोई लक्षण बहुत ज्यादा है, हर महीने दोहराता है, समय के साथ बढ़ रहा है या आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर रहा है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। और अगर कभी खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आएं, तो इसे आपात स्थिति मानकर तुरंत भरोसेमंद व्यक्ति और स्थानीय आपातकालीन या मानसिक स्वास्थ्य सहायता से संपर्क करना चाहिए।

