नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE की प्रस्तावित लिस्टिंग भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। NSE के सार्वजनिक बाजार में आने से जहां देश के IPO बाजार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं गैर-लिस्टेड यानी Unlisted Shares के कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में गैर-लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में निवेश का चलन तेजी से बढ़ा है और NSE इस बाजार का सबसे बड़ा आकर्षण रहा है।
भारत में पिछले दो साल के दौरान IPO के जरिए जुटाई गई पूंजी ने लगातार नए रिकॉर्ड बनाए हैं। इसी तेजी के बीच कई निवेशकों ने कंपनियों के शेयर उनकी लिस्टिंग से पहले खरीदने शुरू किए। खासतौर पर बड़े निवेशक और अमीर व्यक्तिगत निवेशक ऐसी कंपनियों में पैसा लगाने लगे, जिनके भविष्य में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद थी। इससे गैर-लिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री कराने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, विशेष ब्रोकर और दूसरे बिचौलियों का कारोबार भी तेजी से बढ़ा।
NSE की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह उसका मजबूत कारोबार, ऊंचा मुनाफा और भारतीय पूंजी बाजार में उसकी प्रभावशाली स्थिति रही है। लंबे समय तक इसकी लिस्टिंग नहीं होने के कारण निवेशकों को NSE के शेयरों में निजी तौर पर खरीद-बिक्री का मौका मिलता रहा। यही वजह है कि NSE के गैर-लिस्टेड शेयरों ने निवेशकों के बीच खास आकर्षण बनाया।
आंकड़ों पर नजर डालें तो NSE के शेयरधारकों की संख्या में भी पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। IPO से पहले NSE के करीब 2.31 लाख शेयरधारक बताए गए हैं, जबकि 2016 में यह संख्या 80 से भी कम थी। मार्च 2025 की आखिरी उपलब्ध मासिक जानकारी के मुताबिक, उस महीने NSE के गैर-लिस्टेड शेयरों में करीब 1,500 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि NSE के निजी बाजार में कारोबार का आकार कितना बड़ा हो चुका था।
लेकिन NSE की सार्वजनिक लिस्टिंग के बाद तस्वीर बदल सकती है। एक बार NSE के शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध हो गए तो निवेशकों के लिए इन्हें खरीदना और बेचना आसान होगा। ऐसे में गैर-लिस्टेड NSE शेयरों की निजी खरीद-बिक्री का आकर्षण कम होने की संभावना है। इसका असर उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विशेषज्ञ दलालों पर भी पड़ सकता है, जो गैर-लिस्टेड शेयरों के खरीदार और विक्रेता को जोड़ने का काम करते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि NSE के बाद गैर-लिस्टेड शेयर बाजार में निवेशकों का अगला आकर्षण कौन बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिक्ष तकनीक, रक्षा, विमानन, डेटा सेंटर और नए दौर की कारोबारी कंपनियां निवेशकों का ध्यान खींच सकती हैं। स्टरलाइट इलेक्ट्रिक, इंडोफिल इंडस्ट्रीज, क्रास्नी डिफेंस टेक्नोलॉजीज, बेरार फाइनेंस, किनेको, इंडियन पोटाश और गरुड़ एयरोस्पेस जैसी कंपनियों को संभावित विकल्पों के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, गैर-लिस्टेड शेयरों में निवेश का जोखिम भी कम नहीं है। HDB Financial Services और Tata Capital जैसी चर्चित कंपनियों में निवेश करने वाले कुछ निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ा है। NSE के गैर-लिस्टेड शेयरों में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए भी IPO के समय कीमत और वैल्यूएशन बेहद अहम होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बाजार में बड़े रिटर्न के मौके जरूर रहे हैं, लेकिन सही समय पर निवेश और उचित मूल्यांकन सबसे महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर NSE की प्रस्तावित लिस्टिंग सिर्फ एक बड़ी कंपनी के शेयर बाजार में आने तक सीमित नहीं रहेगी। इससे भारतीय IPO बाजार को नई ऊर्जा मिल सकती है, जबकि गैर-लिस्टेड शेयरों के पूरे कारोबार मॉडल को नए सिरे से ढलना पड़ सकता है। आने वाले समय में निवेशकों का फोकस NSE से हटकर किन कंपनियों पर जाता है, यह भारतीय प्री-IPO बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


