सीजीपीएससी भर्ती मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव को सुप्रीम कोर्ट से एक अहम राहत की उम्मीद जगी है। जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। लेकिन क्या ध्रुव को जमानत मिल पाएगी? फिलहाल इस पर फैसला नहीं हुआ है।
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी सीजीपीएससी की वर्ष 2020 से 2022 के दौरान हुई भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ जीवन किशोर ध्रुव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
ध्रुव ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के पांच अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकता है। मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यानी फिलहाल अदालत ने जमानत मंजूर नहीं की है, बल्कि सीबीआई का पक्ष मांगा है।
जीवन किशोर ध्रुव को सीबीआई ने पिछले साल सितंबर में गिरफ्तार किया था। कथित अनियमितताओं के समय वह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के सचिव पद पर कार्यरत थे। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं की गोपनीयता बनाए रखना उनकी आधिकारिक जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर गोपनीयता का उल्लंघन किया।
आरोपों के मुताबिक, प्रश्नपत्र उनके बेटों को उपलब्ध कराए गए। यह भी आरोप है कि इसी आधार पर उनके एक बेटे का चयन उप जिलाधिकारी के पद पर हुआ। उनका बेटा भी इस मामले में आरोपी है। हालांकि, ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
ध्रुव की ओर से जमानत के पक्ष में दलील दी गई थी कि केवल आयोग का सचिव होने के आधार पर उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उनके वकील ने यह भी कहा था कि कथित प्रश्नपत्र लीक में उनकी भागीदारी साबित करने वाला कोई सबूत नहीं है।
इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमानत खारिज करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की गोपनीयता और लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीर टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रश्नपत्र लीक कराने में मदद करने वाले लोग अभ्यर्थियों के करियर के साथ खिलवाड़ करते हैं।
ध्रुव के अलावा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी समेत कई अन्य लोग भी इस मामले में आरोपी हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले सीबीआई को अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद अदालत मामले में आगे की सुनवाई करेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है, लेकिन जीवन किशोर ध्रुव को जमानत मिलने का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।


