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पिज्जा-बर्गर के दौर में UP का भकोसा हुआ गायब! चने की दाल और गेहूं से बनता है ये देसी नाश्ता

पिज्जा, बर्गर और मोमोज के दौर में क्या आप उत्तर प्रदेश के इस पारंपरिक नाश्ते को भूल गए हैं? कभी गांवों में बड़े चाव से खाया जाने वाला भकोसा आज धीरे-धीरे लोगों की थाली से गायब होता जा रहा है। गेहूं के आटे और चने की दाल से बनने वाला यह देसी पकवान स्वाद के साथ अपनी अलग पहचान भी रखता है। आखिर क्या है भकोसा और इसे बनाने का तरीका इतना खास क्यों है?

आजकल फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। खासकर युवा पीढ़ी पिज्जा, बर्गर और मोमोज जैसे व्यंजन पसंद करती है। ऐसे में कई पारंपरिक पकवान धीरे-धीरे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से दूर होते जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश का भकोसा भी ऐसा ही एक पारंपरिक नाश्ता है, जिसे कभी गांवों में घर पर तैयार किया जाता था।

भकोसा गेहूं के आटे और चने की दाल से बनाया जाता है। देखने में यह कुछ हद तक मोमोज या फरा जैसा लग सकता है, लेकिन इसकी सामग्री, मसालों और पकाने का तरीका इसे अलग पहचान देते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसे तलने के बजाय भाप में पकाया जाता है। इसके बाद स्वाद बढ़ाने के लिए तड़का लगाया जाता है।

अब बात करते हैं भकोसा बनाने की विधि की। सबसे पहले गेहूं के आटे को पानी की मदद से गूंथकर तैयार किया जाता है। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें पूरी या छोटी रोटी जैसा आकार दिया जाता है।

अब बारी आती है इसकी भरावन की। चने की दाल को रातभर पानी में भिगोया जाता है और फिर उसे पीस लिया जाता है। इसमें अदरक, हरी मिर्च, लहसुन, हींग और स्वाद के अनुसार मसाले मिलाए जाते हैं। इससे तैयार होती है भकोसे की मसालेदार दाल वाली भरावन।

अब आटे की लोई में इस भरावन को रखा जाता है और उसे आधे चांद जैसा आकार देते हुए किनारों से बंद कर दिया जाता है। इसके बाद इन तैयार भकोसों को पानी की भाप में पकाया जाता है। पकने के बाद इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जा सकता है।

आखिर में आता है स्वाद बढ़ाने वाला तड़का। इसके लिए राई, करी पत्ते और हरी मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है। तड़का लगते ही भकोसे में मसालों की खुशबू और स्वाद का नया मेल तैयार हो जाता है।

भकोसा उन पारंपरिक व्यंजनों में शामिल है, जिनमें स्थानीय सामग्री और घर में इस्तेमाल होने वाली सामान्य चीजों से स्वादिष्ट नाश्ता बनाया जाता है। चने की दाल और गेहूं के आटे का मेल इसे एक अलग पहचान देता है। हालांकि, किसी भी व्यंजन के पौष्टिक होने का असर उसकी मात्रा, सामग्री और बनाने के तरीके पर भी निर्भर करता है।

आज जब नए-नए फास्ट फूड लोगों की पसंद बन रहे हैं, तब भकोसे जैसे पारंपरिक पकवानों को फिर से याद करना हमारी खानपान की विरासत को जानने का एक तरीका है।

तो अगली बार नाश्ते में कुछ देसी और अलग बनाने का मन हो, तो उत्तर प्रदेश के पारंपरिक भकोसे को जरूर याद कीजिए। हो सकता है, यह पुराना स्वाद आपके घर की रसोई में फिर से अपनी जगह बना ले।

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