यमन में हूती लड़ाकों और सरकारी सेना के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर मानवीय संकट को गहरा कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 19 सितंबर से 26 सितंबर के बीच हुई हिंसा में 164 लोगों की मौत हुई, जबकि 645 लोग घायल हुए हैं। यानी सिर्फ एक सप्ताह के दौरान 809 लोग हताहत हुए। WHO के अनुसार, 6 अगस्त से अब तक यमन में संघर्ष से जुड़े कुल हताहतों की संख्या 4,481 तक पहुंच गई है, जिसमें 838 लोगों की मौत शामिल है।
इस हिंसा का सबसे गंभीर असर आम लोगों पर पड़ रहा है। संघर्ष तेज होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा हिंसा के कारण 1,80,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। विस्थापन के चलते हजारों परिवारों के सामने सुरक्षित ठिकाने, भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी जरूरतों का संकट पैदा हो गया है।
यमन में संघर्ष का मौजूदा दौर ऐसे समय में तेज हुआ है जब हूती लड़ाकों ने देश के लाल सागर तट की ओर अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। इस घटनाक्रम ने यमन के लंबे समय से चले आ रहे गृह संघर्ष को क्षेत्रीय तनाव से भी जोड़ दिया है। लाल सागर के आसपास की स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इलाका अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।
संघर्ष बढ़ने से यमन की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी भारी दबाव पड़ रहा है। लंबे समय से जारी युद्ध, आर्थिक संकट, खाद्य असुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ने पहले ही आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। अब नई हिंसा के कारण घायल लोगों के इलाज और विस्थापित परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की चुनौती और बढ़ गई है।
यमन की स्थिति में लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह समुद्री मार्ग एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापार के लिए अहम है। इस क्षेत्र में सुरक्षा बिगड़ने पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका असर पड़ सकता है।
यमन के घटनाक्रम के बीच ईरान की भूमिका को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होती रही है। हूती संगठन को ईरान का समर्थन प्राप्त होने का दावा अमेरिका और उसके सहयोगी देश करते रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान और हूती पक्ष इस मुद्दे पर अपना अलग रुख रखते हैं। यही वजह है कि यमन का संघर्ष केवल घरेलू लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसका संबंध व्यापक क्षेत्रीय तनाव से भी जोड़ा जाता है।
इस बीच पश्चिम एशिया के दूसरे हिस्सों में भी तनाव बना हुआ है। वेस्ट बैंक में इजरायल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने यरूशलम के पास एक विवादित बस्ती परियोजना को 27 अक्टूबर के चुनाव तक रोकने के फैसले की आलोचना की है। यह परियोजना लंबे समय से विवाद का विषय रही है और इसे लेकर इजरायल तथा फिलिस्तीनी पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
गाजा शहर में भी एक अलग घटना में इजरायली हमले के दौरान एक महिला की मौत और दो अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह पश्चिम एशिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्ष और तनाव का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
फिलहाल यमन में WHO के ताजा आंकड़े हालात की गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं। 19 सितंबर से 26 सितंबर के बीच 164 मौतें और 645 घायलों का आंकड़ा बताता है कि हिंसा का मानवीय असर कितना बड़ा है। वहीं 1,80,000 से ज्यादा लोगों का विस्थापन इस संकट को और गंभीर बना रहा है। आने वाले दिनों में अगर संघर्ष कम नहीं हुआ तो यमन में मानवीय सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं और विस्थापित लोगों के पुनर्वास की चुनौती और बढ़ सकती है।


