पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी LPU में 26 सितंबर की रात से शुरू हुआ विवाद कुछ ही घंटों में बड़े छात्र प्रदर्शन और फिर हिंसा में बदल गया। सोशल मीडिया पर गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ कथित रेप की खबर फैलने लगी। छात्रों के बीच यह दावा तेजी से पहुंचा कि हॉस्टल नंबर-3 में एक बाहरी व्यक्ति ने छात्रा के साथ कथित तौर पर रेप किया। कहीं आरोपी को प्लंबर बताया गया तो कहीं इलेक्ट्रिशियन बताया गया। हालांकि शुरुआती दावों की उस समय पुष्टि नहीं हुई थी।
मामला तब और गंभीर हो गया जब कथित रेप की खबर को एक छात्रा की मौत से जोड़कर देखा जाने लगा। सोशल मीडिया पर यह दावा भी फैल गया कि कथित पीड़िता ने आत्महत्या कर ली है और उसे घर भेज दिया गया। बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि एक छात्रा की आत्महत्या की घटना अलग मामला थी। पुलिस के अनुसार, तेलंगाना की रहने वाली एक छात्रा की मौत करीब 15 दिन पहले हुई थी और उसके मामले में पहले से जांच चल रही थी। इसलिए कथित रेप और उस छात्रा की मौत को एक ही घटना मानना सही नहीं है।
अफवाहों और आरोपों के बीच बड़ी संख्या में छात्र गर्ल्स हॉस्टल-3 के आसपास जमा होने लगे। छात्रों की मांग थी कि कथित घटना की जांच हो, एफआईआर दर्ज की जाए और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब दिया जाए। छात्रों ने यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी बाहरी व्यक्ति के कैंपस में प्रवेश का आरोप सही है तो सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित रेप की घटना से इनकार किया। LPU की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया के जरिए गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल की कुछ छात्राओं का वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके कमरे में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। प्रशासन ने मामले की जांच में सहयोग करने की बात कही।
लेकिन विवाद यहीं नहीं रुका। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की संख्या बढ़ती गई और मामला कैंपस से निकलकर नेशनल हाईवे-44 तक पहुंच गया। छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा मार्ग को जाम कर दिया। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और बड़ी संख्या में यात्री घंटों तक फंसे रहे। कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा और पुलिस को ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा।
स्थिति उस वक्त और बिगड़ गई जब पुलिस ने छात्रों से हाईवे खाली करने की अपील की। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की तरफ से पुलिस पर बोतलें और पत्थर फेंके गए। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। झड़प में पुलिसकर्मियों के घायल होने और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। कुछ वाहनों में आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।
हिंसा के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस और आसपास की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं। दुकानों, वाहनों और कुछ अन्य स्थानों पर तोड़फोड़ के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। हालांकि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले हर व्यक्ति की पहचान और उसकी भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात किया।
मामले में पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ रेप का केस दर्ज किया है। जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT भी बनाई गई है। पुलिस जांच में CCTV फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल कथित रेप की घटना को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
इस बीच विश्वविद्यालय ने नियमित कक्षाओं को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया है और मिड-टर्म परीक्षाएं भी टाल दी गई हैं। छात्रों को धीरे-धीरे कैंपस से बाहर जाने की अनुमति दी गई और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पुलिस के अनुसार, बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई और हाईवे पर यातायात बहाल कर दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक अपुष्ट खबर इतनी तेजी से कैसे फैली और देखते ही देखते मामला प्रदर्शन से हिंसा तक कैसे पहुंच गया। एक तरफ छात्रों के गंभीर आरोप हैं, दूसरी तरफ विश्वविद्यालय इन आरोपों को अफवाह बता रहा है, जबकि पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब CCTV, फोरेंसिक जांच और दूसरे सबूतों से यह सामने आएगा कि कथित घटना वास्तव में हुई थी या नहीं और सोशल मीडिया पर फैलाए गए दावों में कितनी सच्चाई थी।


