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गांधी जयंती पर CM योगी का बड़ा बयान, बोले- ‘ग्राम स्वराज में परिवारवादी मॉडल की कोई जगह नहीं’

महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम स्वराज और ग्रामीण विकास को लेकर अपना दृष्टिकोण सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशक्त पंचायत और समृद्ध गांव ही ग्राम स्वराज की आधारशिला हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार गांव को विकास की आखिरी सीढ़ी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की पहली इकाई मानकर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्राम स्वराज केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के सपनों के आत्मनिर्भर गांव का संकल्प है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज की व्यवस्था में परिवारवादी मॉडल के लिए कोई जगह नहीं है। यह बयान उन्होंने गांधी जयंती के अवसर पर ग्रामीण विकास और पंचायत व्यवस्था से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए दिया।

योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों की व्यवस्था को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 57,600 ग्राम सचिवालयों में ई-ग्राम स्वराज, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं। इन डिजिटल लाइब्रेरियों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों, युवाओं और अन्य लोगों को पढ़ाई और डिजिटल संसाधनों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है।

गांधी जी के ग्राम स्वराज के विचार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने सशक्त पंचायत, समृद्ध गांव और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया। उनके अनुसार, जब गांवों में पंचायत व्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर विकास की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री के बयान में ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल व्यवस्था और पंचायतों की भूमिका पर विशेष जोर दिखाई दिया। वहीं, परिवारवादी मॉडल को लेकर उनकी टिप्पणी राजनीतिक संदर्भ में भी देखी जा रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल ग्रामीण विकास, पंचायत व्यवस्था और स्थानीय नेतृत्व को लेकर लगातार अपनी-अपनी नीतियां और विचार सामने रखते रहे हैं।

ग्राम सचिवालयों में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के साथ सरकार का जोर ग्रामीण नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच देने पर भी है। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य पंचायत स्तर पर होने वाले कामकाज को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

डिजिटल लाइब्रेरी की योजना के जरिए गांवों में शिक्षा और तकनीक को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अगर इन सुविधाओं का प्रभावी तरीके से संचालन होता है, तो ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों और युवाओं को पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और डिजिटल शिक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर संसाधन मिल सकते हैं।

गांधी जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश मुख्य रूप से ग्राम स्वराज, पंचायतों को मजबूत करने, गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और डिजिटल सुविधाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर केंद्रित रहा। परिवारवादी मॉडल को लेकर दिया गया बयान राजनीतिक चर्चा का विषय जरूर बना है, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ग्रामीण विकास और पंचायत व्यवस्था से जुड़ी योजनाओं को भी प्रमुखता से सामने रखा।

अब इन योजनाओं और डिजिटल सुविधाओं का गांवों में जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव दिखाई देता है, यह उनके क्रियान्वयन और स्थानीय लोगों की भागीदारी से तय होगा। गांधी जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री का यह संदेश उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास मॉडल और ग्राम पंचायतों की भूमिका को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखता है।

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