रूस और तालिबान के बीच बढ़ते सैन्य संपर्क ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन का एक रक्षा प्रतिनिधिमंडल रूस में आयोजित सैन्य अभ्यास में शामिल हुआ, जहां आधुनिक सैन्य तकनीक, ड्रोन, मिसाइल प्रणालियों और हथियारों से जुड़ी जानकारी पर चर्चा हुई। इस घटनाक्रम को खास तौर पर पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के समय में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद और सैन्य कार्रवाई को लेकर कई बार तनाव की स्थिति बनी है। पाकिस्तान की ओर से अफगान क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों के बाद तालिबान प्रशासन ने कड़ा विरोध जताया था। रूस ने भी अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए तनाव कम करने की अपील की थी। अब इसी पृष्ठभूमि में तालिबान के रक्षा अधिकारियों का रूस के सैन्य अभ्यास में पहुंचना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
रूस में आयोजित सैन्य अभ्यास के दौरान अफगान प्रतिनिधिमंडल को आधुनिक सैन्य उपकरणों और युद्ध तकनीक से जुड़ी जानकारी हासिल करने का अवसर मिला। रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों सहित कई आधुनिक हथियार प्रणालियों का अध्ययन किया। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि रूस ने तालिबान को सीधे तौर पर किसी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार किया है। फिलहाल सामने आए घटनाक्रम को सैन्य सहयोग और संपर्क बढ़ने के रूप में ही देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू रूस और तालिबान के बदलते रिश्ते हैं। एक समय ऐसा था जब अफगानिस्तान में सोवियत संघ की मौजूदगी के खिलाफ लड़ने वाले समूहों को पाकिस्तान से समर्थन मिलता था। लेकिन दशकों बाद क्षेत्र की परिस्थितियां बदल चुकी हैं और रूस अब तालिबान प्रशासन के साथ राजनयिक तथा सुरक्षा संबंध बढ़ाता दिखाई दे रहा है।
रूस के सैन्य अभ्यास में अफगान प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के दौरान भारत, चीन और अन्य देशों के सैन्य अधिकारियों से संपर्क और बातचीत भी चर्चा का विषय बनी। इससे यह संकेत मिलता है कि अफगानिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय सैन्य संबंधों को लेकर अलग-अलग देशों के बीच संवाद बढ़ रहा है।
पाकिस्तान के लिए यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि अफगानिस्तान के साथ उसकी सीमा पर पहले से ही तनाव मौजूद है। दोनों पक्षों के बीच सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और सैन्य कार्रवाई को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। ऐसे समय में तालिबान का रूस के साथ सैन्य स्तर पर संपर्क बढ़ना इस क्षेत्र की रणनीतिक परिस्थितियों को और जटिल बना सकता है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि रूस तालिबान को पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए तैयार कर रहा है। उपलब्ध जानकारी से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि तालिबान के रक्षा अधिकारियों ने रूस में आधुनिक सैन्य तकनीक और हथियार प्रणालियों से संबंधित जानकारी हासिल की है और विभिन्न देशों के सैन्य प्रतिनिधियों के साथ संपर्क किया है।
आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि रूस और तालिबान के बीच यह सैन्य संपर्क कितना आगे बढ़ता है और इसका असर अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंधों पर कितना पड़ता है। अगर दोनों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग आगे बढ़ता है, तो दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की रणनीतिक तस्वीर में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौती के रूप में जरूर सामने आया है।


