भारत ने 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय ओलंपिक संघ यानी IOA की अध्यक्ष पीटी उषा और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने बुधवार को बताया कि भारत अक्टूबर के अंत में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति यानी IOC के भविष्य मेजबान आयोग के सामने अपनी दावेदारी की पहली प्रस्तुति देगा। भारत ने इस अभियान के लिए ‘Rising Together’ यानी ‘साथ मिलकर आगे बढ़ना’ को अपना विजन बनाया है।
भारत की दावेदारी में देश की युवा शक्ति, बढ़ती खेल संस्कृति और भविष्य की संभावनाओं को प्रमुखता से सामने रखा जाएगा। ‘Rising Together’ को सिर्फ एक नारे के तौर पर नहीं बल्कि भारत के विकास, विविधता और खेलों के प्रति बढ़ती रुचि को एक साथ जोड़ने वाली सोच के रूप में पेश किया जाएगा। भारतीय ओलंपिक संघ का मानना है कि 2036 ओलंपिक की मेजबानी देश के लिए खेलों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकती है।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि 2036 के लिए भारत की महत्वाकांक्षा इस विचार पर आधारित है कि खेल देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी से देश के लाखों युवाओं को खेलों से जुड़ने की प्रेरणा मिल सकती है। इसके साथ ही स्वस्थ और सक्रिय समुदायों को बढ़ावा देने के साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
अहमदाबाद 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत का पसंदीदा शहर बनकर उभरा है। भारत में अभी तक ओलंपिक खेलों का आयोजन नहीं हुआ है। ऐसे में अगर भारत को मेजबानी मिलती है तो यह देश के खेल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी। भारत की योजना खेलों के साथ-साथ आधुनिक बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक विकास की अपनी क्षमता को भी सामने रखने की है।
पीटी उषा ने कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ भारत की ओलंपिक मेजबानी की आकांक्षाओं को मिली मान्यता से सम्मानित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को 2036 खेलों के संभावित मेजबानों के समूह का हिस्सा होने पर गर्व है। उनके मुताबिक ‘Rising Together’ भारत की ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और विविधता को एक साझा ओलंपिक सपने के साथ जोड़ने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पीटी उषा ने यह भी कहा कि 2036 के लिए भारत ऐसा आयोजन करना चाहता है जो युवा, गतिशील और उभरते भारत के आत्मविश्वास को प्रदर्शित करे। साथ ही भारत की कोशिश होगी कि इन खेलों के जरिए ओलंपिक और पैरालंपिक आंदोलन को नई पीढ़ियों और नए समुदायों तक पहुंचाने में योगदान दिया जा सके।
भारत ने 2024 में 2036 ओलंपिक की मेजबानी में रुचि जताते हुए IOC को अपना एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट सौंपा था। इसके बाद अब चयन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। IOC के अनुसार भारत के अलावा जर्मनी, कतर, तुर्किये, हंगरी, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका भी 2036 ओलंपिक की मेजबानी में रुचि रखने वाले देशों में शामिल हैं।
IOC की ओर से दावेदार देशों की योजनाओं का मूल्यांकन कई महत्वपूर्ण आधारों पर किया जाएगा। इसमें आयोजन स्थलों की मास्टर प्लानिंग, खिलाड़ियों के अनुभव, वित्तीय व्यवस्था, राजनीतिक और जनता का समर्थन, खेलों के आयोजन की क्षमता और मेजबान शहरों तथा स्थानीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक लाभ जैसे पहलू शामिल होंगे।
अक्टूबर के अंत में होने वाली भारत की पहली प्रस्तुति के बाद चयन प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा। इसके बाद रणनीतिक संवाद और अन्य मूल्यांकन प्रक्रियाओं के जरिए संभावित मेजबान की योजना को परखा जाएगा। अंतिम चयन प्रक्रिया 2028 में आगे बढ़ने की उम्मीद है।
भारत के लिए 2036 ओलंपिक की मेजबानी केवल एक अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन हासिल करने की कोशिश नहीं है, बल्कि इसे देश में खेलों को और मजबूत करने के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है। ‘Rising Together’ विजन के जरिए भारत अब IOC के सामने अपनी खेल क्षमता, युवा शक्ति, बुनियादी ढांचे और भविष्य की योजनाओं को पेश करने की तैयारी में है।


