उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक 14 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। तीनों विधायकों के भाजपा में शामिल होने के लिए अमेठी के गौरीगंज में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, इस कार्यक्रम में भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रह सकते हैं। तीनों नेताओं को इसी कार्यक्रम में भाजपा की औपचारिक सदस्यता दिलाए जाने की तैयारी है। राकेश प्रताप सिंह ने खुद भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है। इसके बाद इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा तेज हो गई है।
इन तीनों विधायकों का समाजवादी पार्टी से राजनीतिक संबंध पहले ही कमजोर हो चुका था। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान तीनों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद तीनों विधायक सपा से बागी माने जाने लगे थे। बाद में समाजवादी पार्टी ने राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था। अब 14 अक्टूबर को इन तीनों का भाजपा में औपचारिक प्रवेश होने जा रहा है।
राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट से लंबे समय से राजनीति कर रहे हैं। वह वर्ष 2012, 2017 और 2022 में लगातार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था। राज्यसभा चुनाव के बाद उन्होंने सपा से दूरी बना ली और बाद में पार्टी से उनका संबंध औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। अब वह भाजपा के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं।
दूसरे विधायक अभय सिंह अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट से आते हैं। वह वर्ष 2012 और 2022 में विधायक चुने गए। वर्ष 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद उनका सपा नेतृत्व से राजनीतिक मतभेद सामने आया और उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली। बाद में उन्हें भी समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल जाएगी।
तीसरे विधायक विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी विधानसभा सीट से हैं। उनका राजनीतिक सफर समाजवादी पार्टी से पहले कांग्रेस से भी जुड़ा रहा है। वह वर्ष 2007 में पहली बार विधायक बने थे और वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर दोबारा विधानसभा पहुंचे। 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान करने के बाद वह भी सपा के बागी विधायकों में शामिल हो गए। अब वह राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह के साथ भाजपा की सदस्यता लेने जा रहे हैं।
तीनों विधायकों के भाजपा में शामिल होने का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में नेताओं का एक दल से दूसरे दल में जाना आने वाले चुनावों के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनावी प्रभाव का अंतिम आकलन चुनाव के दौरान मतदाताओं के रुख और वास्तविक चुनाव परिणामों से ही होगा।
गौरीगंज में होने वाले कार्यक्रम को लेकर भाजपा की ओर से तैयारियां शुरू होने की जानकारी सामने आई है। राकेश प्रताप सिंह के आवास के पास कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात कही जा रही है। इसमें बड़ी संख्या में समर्थकों और कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना है। तीनों नेताओं के समर्थक भी इस सदस्यता कार्यक्रम को लेकर सक्रिय बताए जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन तीन विधायकों ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, वे अब औपचारिक रूप से भाजपा का हिस्सा बनने जा रहे हैं। यानी जिस राजनीतिक दूरी की शुरुआत राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई थी, वह अब दल बदल के रूप में सामने आ रही है। 14 अक्टूबर को होने वाला सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम इस राजनीतिक बदलाव को औपचारिक रूप देगा।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब सबकी नजर 14 अक्टूबर के कार्यक्रम पर रहेगी। एक तरफ तीन बागी विधायकों का भाजपा में प्रवेश होगा, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम उसके पूर्व विधायकों के राजनीतिक भविष्य और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह भी देखना होगा कि इन नेताओं के भाजपा में शामिल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में और कौन से बदलाव सामने आते हैं और क्या दूसरे नेता भी इसी तरह अपना राजनीतिक रुख बदलते हैं।


