नवरात्रि के व्रत में कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी,पकौड़ी और चीला खाना कई लोगों को पसंद होता है। लेकिन त्योहारों के दौरान बाजार में मिलने वाले आटे की गुणवत्ता पर ध्यान देना भी जरूरी है। खराब या दूषित आटा खाने से पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में कुट्टू का आटा खरीदते समय उसकी पैकिंग,निर्माण तिथि और गुणवत्ता की जांच जरूर करें।
कुट्टू का आटा खरीदने से पहले उसकी बनावट और महक पर ध्यान दें। आमतौर पर कुट्टू का आटा हल्का दरदरा होता है। अगर उसमें नमी,फफूंद या असामान्य गंध महसूस हो,तो उसका इस्तेमाल न करें। आटे को सूखी और साफ जगह पर रखें,ताकि उसमें नमी न पहुंचे।
कई लोग आटे की शुद्धता जांचने के लिए पानी में मिलाकर देखते हैं। हालांकि,सिर्फ पानी का रंग बदलने या आटे के नीचे बैठने से यह साबित नहीं होता कि आटा शुद्ध है या मिलावटी। इसी तरह नींबू का रस डालने पर बुलबुले उठना भी मिलावट का पक्का प्रमाण नहीं है। इसलिए घरेलू तरीकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भरोसेमंद दुकानदार से आटा खरीदें और पैकेट पर दी गई जानकारी देखें।
आटे को छूकर भी उसकी स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर आटा असामान्य रूप से गीला हो,उसमें गांठें हों या कीड़े दिखाई दें,तो उसका सेवन न करें। सीलन,फफूंद या खराब गंध मिलने पर भी आटे को इस्तेमाल करने से बचें।
कुट्टू के आटे में प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन नहीं होता। इसलिए इसका आटा गेहूं के आटे की तरह आसानी से नहीं बंधता। हालांकि,आटा गूंथने में आसानी या कठिनाई के आधार पर ही मिलावट की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसकी शुद्धता जानने के लिए जरूरत पड़ने पर खाद्य जांच कराना ही विश्वसनीय तरीका है।
नवरात्रि के दौरान व्रत का भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखें। आटे को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह जांचें और अगर उसके सेवन के बाद उल्टी,दस्त या पेट दर्द जैसी परेशानी हो,तो चिकित्सकीय सलाह लें।
याद रखें,सिर्फ रंग,महक या घरेलू परीक्षण के आधार पर कुट्टू के आटे को पूरी तरह शुद्ध नहीं माना जा सकता। सावधानी से खरीदारी करें और किसी भी तरह का संदेह होने पर उसका सेवन न करें।

