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बदलते मौसम में बच्चों पर मंडरा रहा बीमारियों का खतरा! सर्दी-जुकाम, फ्लू और इंफेक्शन से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

मौसम में थोड़ा सा बदलाव और बच्चों की सेहत पर पड़ने लगता है असर! कभी सर्दी-जुकाम, तो कभी बुखार, फ्लू और एलर्जी… आखिर बदलते तापमान में बच्चे इतनी जल्दी बीमार क्यों पड़ जाते हैं और उन्हें इन मौसमी बीमारियों से कैसे बचाया जा सकता है? आइए जानते हैं।

बदलते मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव, हवा में मौजूद धूल और एलर्जी पैदा करने वाले तत्व बच्चों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। खासकर छोटे बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक चिंता का विषय होता है। ऐसे में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों की साफ-सफाई, खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें।

बदलते मौसम में बच्चों को सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम की समस्या देखने को मिलती है। बहती नाक, लगातार छींक आना, हल्की खांसी और गले में खराश इसके प्रमुख लक्षण हैं। कई तरह के वायरस इसके लिए जिम्मेदार होते हैं, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और दूषित सतहों के जरिए फैल सकते हैं।

इसके अलावा मौसमी फ्लू भी बच्चों को प्रभावित कर सकता है। सामान्य सर्दी-जुकाम की तुलना में फ्लू के लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं। तेज बुखार, बदन दर्द, ठंड लगना, थकान, सिरदर्द और सूखी खांसी इसके प्रमुख लक्षण हैं। अगर बच्चा लगातार परेशान है या उसकी हालत बिगड़ रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बदलते मौसम में बच्चों को मौसमी एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। हवा में मौजूद धूल और परागकणों के कारण छींक आना, नाक बहना, आंखों में खुजली और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं, गले में संक्रमण होने पर दर्द, खराश और निगलने में परेशानी हो सकती है।

कुछ बच्चों को पेट से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। दूषित भोजन या पानी और संक्रमण के कारण पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत हो सकती है। ऐसी स्थिति में बच्चों को पर्याप्त तरल पदार्थ देना जरूरी है। अगर बच्चा पानी नहीं पी पा रहा है, बहुत सुस्त है या पेशाब कम कर रहा है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

अब सवाल है कि आखिर बच्चों को इन मौसमी बीमारियों से कैसे बचाया जाए? सबसे पहले मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं। सुबह और शाम ठंडक होने पर जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त परत पहनाई जा सकती है। हालांकि, बच्चों को जरूरत से ज्यादा कपड़े पहनाकर गर्मी और पसीने से बचाना भी जरूरी है।

संक्रमण से बचाव के लिए बच्चों को हाथ धोने की आदत जरूर सिखाएं। खाना खाने से पहले, शौचालय के इस्तेमाल के बाद और खांसने या छींकने के बाद साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है। बच्चों को खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने की आदत भी डालें।

बच्चों की अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त नींद भी महत्वपूर्ण है। आम तौर पर 3 से 5 साल के बच्चों को 10 से 13 घंटे, 6 से 12 साल के बच्चों को 9 से 12 घंटे और 13 से 18 साल के किशोरों को 8 से 10 घंटे की नींद की जरूरत होती है। नियमित दिनचर्या उनकी सेहत बनाए रखने में मदद करती है।

इसके साथ ही बच्चों के भोजन में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें। पर्याप्त पानी पिलाएं और उन्हें खेलने-कूदने तथा शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही, उम्र के अनुसार जरूरी टीकाकरण समय पर करवाएं और डॉक्टर की सलाह से मौसमी फ्लू का टीका लगवाने पर विचार करें।

ध्यान रखें, हर सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत नहीं होती, क्योंकि ज्यादातर सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होते हैं। बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं न दें। अगर सांस लेने में परेशानी हो, बच्चा असामान्य रूप से सुस्त हो जाए, पानी न पी पाए या उसकी हालत तेजी से बिगड़े, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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